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गिग वर्कर्स के समर्थन में अशोक गहलोत

गिग वर्कर्स के समर्थन में अशोक गहलोत

शोभना शर्मा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गिग इकोनॉमी और क्विक कॉमर्स सेक्टर में कार्यरत डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा पारित गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट को मौजूदा सरकार ने लागू नहीं किया, जिससे इन मेहनतकश युवाओं की सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों को नुकसान हुआ है।

गहलोत ने यह बातें जयपुर स्थित अपने आवास पर गिग वर्कर्स से मुलाकात के दौरान कहीं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि ये वर्कर्स दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी हो रही है।

पहली बार राजस्थान में बना था गिग वर्कर्स के लिए कानून

गहलोत ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भारत में पहली बार गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून राजस्थान में लाया गया था।

इस कानून के तहत:

  • डिलीवरी और गिग वर्कर्स के लिए बीमा योजना,

  • काम के घंटे तय करने,

  • बिना कारण नौकरी से निकाले जाने पर रोक,

  • और 200 करोड़ रुपए के गिग वर्कर्स वेलफेयर फंड एवं बोर्ड के गठन का प्रावधान था।

गहलोत के अनुसार, अगर यह कानून लागू होता तो इंटरनेट आधारित कंपनियों की मनमानी पर रोक लग सकती थी और लाखों गिग वर्कर्स को न्यूनतम सुरक्षा प्राप्त होती।

लिफ्ट के उपयोग पर रोक को बताया अमानवीय

गहलोत ने गिग वर्कर्स के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि कई रेसिडेंशियल सोसाइटीज़ में डिलीवरी वर्कर्स को लिफ्ट के इस्तेमाल से वंचित किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि एक अमानवीय व्यवहार है।

उन्होंने लिखा कि ऐसे वर्कर्स 14 से 18 घंटे तक काम करते हैं, और उन्हें भारी बैग के साथ सीढ़ियां चढ़ने-उतरने पर मजबूर करना शोषण जैसा है। समाज को इनके प्रति सहानुभूति का भाव रखना चाहिए।

भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप

गहलोत ने मौजूदा भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट को लागू नहीं किया गया, जिससे इन वर्कर्स में गहरा असंतोष है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने भले ही बजट में गिग वर्कर्स के फंड को बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन इसकी कोई जमीनी क्रियान्वयन प्रक्रिया नहीं हुई है।

कानून का न होना बना असुरक्षा का कारण

गहलोत का कहना है कि आज गिग वर्कर्स न बीमा सुरक्षा के दायरे में हैं, न उनके काम के घंटे तय हैं, और न ही उन्हें नौकरी की स्थिरता प्राप्त है। अगर कांग्रेस सरकार द्वारा पारित कानून को लागू कर दिया गया होता, तो इनका भविष्य अधिक सुरक्षित होता।

उन्होंने सरकार से अपील की कि वह गिग इकोनॉमी वर्कर्स की पीड़ा को समझे और तत्काल प्रभाव से वेलफेयर एक्ट को लागू करे।

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