शोभना शर्मा। जयपुर में आज साहित्य और सिनेमा का एक अद्वितीय संगम देखने को मिला, जब अभिनेत्री और अब लेखिका बनीं हुमा एस. कुरैशी ने अपनी पहली किताब ‘जेबा: एन एक्सीडेंटल सुपरहीरो’ का औपचारिक विमोचन किया। इस आयोजन का आयोजन विशाल माथुर कंसल्टेंट्स और होटल फेयरमोंट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, मीडिया और फैशन से जुड़े कई चर्चित चेहरे शामिल हुए और इस विशेष अवसर को साझा किया।
इस मौके पर हुमा कुरैशी ने पुस्तक की विषयवस्तु, लेखन की प्रेरणाओं और महिला सशक्तिकरण पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ‘जेबा’ केवल एक काल्पनिक किरदार नहीं है, बल्कि एक ऐसी महिला की कहानी है जो रोजमर्रा की कठिनाइयों, सामाजिक दबावों और आत्म-संदेह से लड़ती हुई खुद की पहचान बनाती है।
हुमा ने कहा, “मैं एक ऐसी कहानी कहना चाहती थी, जो केवल मनोरंजन न करे, बल्कि सोचने पर मजबूर करे। ‘जेबा’ एक एक्सीडेंटल सुपरहीरो है, जो आम जिंदगी की नायिका है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह कहानी उन्हें उनके परिवार, विशेष रूप से उनकी मां से प्रेरणा लेकर लिखनी शुरू की, जो हमेशा चाहती थीं कि हुमा कुछ लिखें।
“बुरी लड़कियों” का कॉन्सेप्ट मुझे पसंद है
महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हुमा ने कहा, “हमेशा औरतों से अच्छे बर्ताव की उम्मीद की जाती है, लेकिन मुझे उन लड़कियों का कॉन्सेप्ट पसंद है जिन्हें समाज बुरा कहता है। वे जो घर संभालती हैं, बाहर काम करती हैं, और देश भी चला सकती हैं। ‘जेबा’ उन सभी महिलाओं की प्रतीक है जो सिस्टम से बाहर हैं, जिन्हें ‘मिसफिट्स’ कहा जाता है।”
हुमा ने यह भी जोड़ा कि असल सुपरहीरो वे महिलाएं होती हैं जो तमाम कमजोरियों के बावजूद रोज लड़ती हैं और जीतती हैं। उन्होंने कहा, “सुपरहीरो को परफेक्ट होना ज़रूरी नहीं है। वह साड़ी में हो सकती है, बुर्के में हो सकती है, और फिर भी पूरी ताकत से लड़ सकती है।”
कोविड काल में हुई लेखन प्रक्रिया की शुरुआत
हुमा ने बताया कि इस उपन्यास की शुरुआत 2019 में एक फिल्म या वेब सीरीज के आइडिया के रूप में हुई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान जब फिल्म निर्माण ठप हो गया, तब उन्होंने इसे एक उपन्यास का रूप देने का फैसला किया। उन्होंने इस पूरी कहानी को स्वयं लिखा, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि केवल वही इसे सही ढंग से अभिव्यक्त कर सकती हैं।
लेखन प्रक्रिया को उन्होंने “कैथार्टिक” अनुभव बताया, जिसका मतलब है – भावनात्मक रूप से शुद्धिकरण। उनके अनुसार यह लेखन उनके लिए व्यक्तिगत यात्रा और आत्म-अन्वेषण का जरिया भी था।
उपन्यास का विमोचन और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में उपन्यास का विमोचन जानी-मानी सोशल एंटरप्रेन्योर विन्नी कक्कड़ द्वारा किया गया। साथ ही इस सत्र को वरिष्ठ पत्रकार ताबीना अंजुम ने मॉडरेट किया। मंच पर चर्चा के दौरान फिल्म निर्माता सौरभ कक्कड़, कला प्रेमी सुधीर कासलीवाल, फिल्म वितरक राज बंसल, आभूषण डिज़ाइनर सुनीता शेखावत, लेखिका संगीता जुनेजा और अन्य कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
भावनाओं और प्रतीकों की परतें खोलता उपन्यास
विशाल माथुर ने हुमा के उपन्यास की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, प्रतीकों और आंतरिक शक्ति की परतों को खोलने वाली एक रचना है। हुमा ने ‘जेबा’ की यात्रा को इतनी सहजता से लिखा है कि पाठक को यह शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है।”
एक वेब सीरीज या फिल्म में बदलने की इच्छा
हुमा ने यह भी खुलासा किया कि वह इस कहानी को भविष्य में वेब सीरीज या फिल्म के रूप में देखना चाहती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसका पैमाना हॉलीवुड जैसा होगा और इसके लिए काफी बड़े बजट की जरूरत होगी।
हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास स्त्री सशक्तिकरण, आत्मबल, सामाजिक असमानता और व्यक्तिगत संघर्ष जैसे विषयों को गहराई और संवेदनशीलता से सामने लाता है।