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देशनोक करणी माता मंदिर में सावन भादो कढ़ाई महाप्रसादी का आयोजन

देशनोक करणी माता मंदिर में सावन भादो कढ़ाई महाप्रसादी का आयोजन

मनीषा शर्मा।  राजस्थान के बीकानेर जिले के प्रसिद्ध देशनोक करणी माता मंदिर में इस बार ‘सावन भादो कढ़ाई’ महाप्रसादी के अंतर्गत 17,500 किलो दाल का हलवा तैयार किया जा रहा है। इस महाप्रसाद का वितरण नए साल के पहले दिन करणी माता के भक्तों के बीच किया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है, बल्कि इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की भी योजना बनाई गई है।

महाप्रसादी में दाल का हलवा: इतिहास में पहली बार

करणी माता मंदिर में ‘सावन भादो कढ़ाई’ महाप्रसादी की एक अनूठी परंपरा है। इस बार 17,500 किलो दाल का हलवा बनाया जा रहा है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक पहल है। मंदिर के महंत डॉ. करणी प्रताप सिंह के अनुसार, यह आयोजन पिछले 100 वर्षों में पहली बार हो रहा है, जब दाल का हलवा महाप्रसाद के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस महाप्रसाद को तैयार करने के लिए विशाल मात्रा में सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें 3,130 किलो मूंग दाल, 3,130 किलो घी, 3,912 किलो चीनी, 4,500 किलो मावा, और 1 किलो केसर डाला जा रहा है। इसके अलावा, हलवे को स्वादिष्ट बनाने के लिए 6 किलो इलायची, 100 किलो बादाम की कतरन, और 51 किलो पिस्ता भी मिलाया जा रहा है।

महाप्रसाद तैयार करने में जुटे 200 कार्यकर्ता

इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए 200 से अधिक कार्यकर्ता पिछले दो दिनों से मंदिर परिसर में कार्यरत हैं। हलवा तैयार करने के लिए मंदिर परिसर में विशेष रूप से विशाल कढ़ाई रखी गई है। इस कढ़ाई का निर्माण बीकानेर के पूर्व महाराजा गंगा सिंह ने किया था। कढ़ाई को लकड़ी और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके गर्म किया जा रहा है। पहले दाल को छोटी कढ़ाइयों में सेंका जाता है और फिर इसे बड़ी कढ़ाई में डालकर हलवा तैयार किया जाता है। भक्तगण अलग-अलग समय पर दाल को हिलाने और हलवा बनाने के विभिन्न चरणों में सहायता करते हुए देखे जा सकते हैं।

सावन भादो कढ़ाई: भक्तों की मनोकामना पूर्ति का प्रतीक

करणी माता मंदिर में ‘सावन भादो कढ़ाई’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यदि किसी की मनोकामना पूर्ण होती है, तो वह इस आयोजन में भाग लेकर माता को कढ़ाई का भोग अर्पित करता है। यह आयोजन हर साल कन्या पूजन और नववर्ष के मौके पर होता है। इस बार आयोजन को विशेष बनाने के लिए इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की योजना बनाई गई है। इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम को आमंत्रित किया गया है, जो इस आयोजन का दस्तावेजीकरण करेगी।

देशभर से भक्तों का आगमन

महाप्रसादी में भाग लेने और प्रसाद ग्रहण करने के लिए जयपुर, जोधपुर, नागौर, और राजस्थान के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त देशनोक पहुंच चुके हैं। मंदिर के आसपास के होटल और धर्मशालाएं पूरी तरह से बुक हो चुकी हैं।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने की तैयारी

मंदिर के आयोजकों का दावा है कि यह विश्व का सबसे बड़ा महाप्रसाद होगा। आयोजकों ने इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का प्रयास शुरू कर दिया है। गिनीज टीम के सदस्य इस आयोजन का साक्षी बनने के लिए आज शाम तक देशनोक पहुंचने वाले हैं।

सार्वजनिक भागीदारी और धार्मिक उत्साह

इस महाप्रसादी आयोजन ने धार्मिक श्रद्धा और सामाजिक समर्पण का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। हर वर्ग के लोग, चाहे वह मंदिर के पुजारी हों, भक्त हों, या स्थानीय निवासी, सभी इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि सामुदायिक एकता और सहयोग का संदेश भी देता है।

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