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अजमेर डिस्कॉम के निजीकरण विरोध में 17 जिलों के कर्मचारियों ने दिया धरना

अजमेर डिस्कॉम के निजीकरण विरोध में 17 जिलों के कर्मचारियों ने दिया धरना

शोभना शर्मा,अजमेर। राजस्थान में विद्युत निगमों के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इसी के तहत अजमेर डिस्कॉम के 17 जिलों के कार्मिकों ने निजीकरण के विरोध में अजमेर मुख्यालय पंचशील पर एकजुट होकर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने न केवल निजीकरण का विरोध किया, बल्कि पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने, जीपीएफ कटौती चालू करने और सीपीएफ कटौती को बंद करने की अपनी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया।

धरने में कर्मचारियों का आक्रोश

अजमेर संभाग के भारतीय मजदूर संघ के संगठन मंत्री विनीत कुमार जैन ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि यह धरना निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अगर सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती है, तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण से न केवल कर्मचारियों का नुकसान होगा, बल्कि आम जनता की बिजली सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।  प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि विद्युत विभाग में नई भर्तियां खोली जाएं, ताकि बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सके। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मजदूर एकजुट हो जाएं, तो किसी भी स्थिति में निजीकरण को लागू नहीं होने दिया जाएगा।

राजस्थान के 17 जिलों से पहुंचे कर्मचारी

इस धरने प्रदर्शन में अजमेर डिस्कॉम के तहत आने वाले 17 जिलों के कर्मचारी शामिल हुए। इनमें अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, भीलवाड़ा, शाहपुरा, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़ और सलूम्बर के कर्मचारी बड़ी संख्या में पहुंचे।

पहले भी हुआ था प्रदर्शन

यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदर्शन हुआ है। इससे पहले 29 नवंबर को भी कर्मचारियों ने जिला और वृत कार्यालयों पर कार्य बहिष्कार किया था। इसके तहत लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया गया और सरकार को ज्ञापन सौंपे गए। अधिकारियों और कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय से जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आने वाले समय में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

प्रमुख मांगें

धरने में कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया:

  1. निजीकरण का पूर्ण विरोध: उन्होंने कहा कि विद्युत निगमों का निजीकरण कर्मचारियों और आम जनता दोनों के हितों के खिलाफ है।

  2. पुरानी पेंशन योजना लागू करें: कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग की।

  3. नई भर्तियों की शुरुआत: उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को रोजगार देने का वादा पूरा करना चाहिए और नई भर्तियां खोलनी चाहिए।

  4. जीपीएफ कटौती चालू करें और सीपीएफ बंद करें: कर्मचारियों ने आर्थिक असुरक्षा को खत्म करने के लिए यह मांग उठाई।

आम जनता का समर्थन

धरने में वक्ताओं ने बताया कि इस आंदोलन में न केवल कर्मचारियों का समर्थन है, बल्कि आम जनता भी उनके साथ खड़ी है। उनका कहना था कि निजीकरण से बिजली की दरों में बढ़ोतरी होगी और सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट आएगी।

आंदोलन की अगली रणनीति

राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और तेज होगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यह केवल एक शुरुआत है, और यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आगामी समय में राज्यव्यापी हड़ताल की जाएगी।

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