मनीषा शर्मा। राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती परीक्षा 2021 में चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग पर रोक लगा दी है। साथ ही, ट्रेनी एसआई की पासिंग आउट परेड भी रोकने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह कदम भर्ती प्रक्रिया में हुए फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले को देखते हुए उठाया है। जस्टिस समीर जैन की अध्यक्षता वाली एकलपीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
फर्जीवाड़े के कारण योग्य अभ्यर्थी वंचित
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील हरेंद्र नील ने दलील दी कि इस भर्ती प्रक्रिया में शुरुआत से ही अनियमितताएं थीं। पाली जिले में पेपर लीक की एफआईआर दर्ज होने के बाद विभिन्न जिलों में मामले दर्ज हुए। एसओजी और पुलिस मुख्यालय ने भी इस परीक्षा में धांधली की पुष्टि की और इसे रद्द करने की सिफारिश की।
मुख्य आरोप:
- पेपर लीक की घटना परीक्षा से 30 दिन पहले हुई।
- करीब 150 लोगों तक यह पेपर पहुंच चुका था।
- आरपीएससी के दो पूर्व सदस्य भी इस फर्जीवाड़े में शामिल पाए गए।
- अब तक 50 ट्रेनी एसआई और 30 से अधिक अन्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
एसआई भर्ती में फर्जीवाड़ा: जांच के मुख्य बिंदु
- पेपर लीक का मामला:
एसओजी की जांच में पाया गया कि पेपर लीक गैंग ने परीक्षा से पहले ही पेपर को उम्मीदवारों तक पहुंचा दिया। गिरफ्तार हुए आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और रामू राईका इस पूरे षड्यंत्र में शामिल थे। - अधिकारियों की संलिप्तता:
आरपीएससी के पूर्व सदस्य रामू राईका ने अपने बेटे और बेटी के लिए पेपर लीक कराया था। उन्होंने परीक्षा से छह दिन पहले अपने बच्चों को पेपर उपलब्ध कराकर उन्हें तैयारी करवाई। - गिरफ्तारियां:
एसओजी ने अप्रैल 2024 से अब तक 50 ट्रेनी एसआई और 30 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें आरपीएससी के पूर्व सदस्य और पेपर लीक गैंग के सदस्य शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय और एसओजी की सिफारिशें अनसुनी
पुलिस मुख्यालय और एसओजी ने सरकार से इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार ने एक जांच समिति गठित करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस दौरान चयनित अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई।
पासिंग आउट परेड और पोस्टिंग पर रोक
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक चयनित एसआई की पोस्टिंग और पासिंग आउट परेड पर रोक रहेगी।
फर्जीवाड़े का प्रभाव
इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा असर उन योग्य अभ्यर्थियों पर पड़ा, जो ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हुए थे। इन अनियमितताओं के चलते ऐसे अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए।


