मनीषा शर्मा। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित लेख के बाद राजनीतिक जगत में खलबली मच गई है। इस लेख में राहुल गांधी ने कुछ ऐसे विचार प्रस्तुत किए, जिनसे भारतीय इतिहास और राजवंशों के योगदान को लेकर कई नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। खासकर राजस्थान के राजपूत समाज और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने राहुल गांधी के विचारों को “इतिहास के प्रति अज्ञानता” और “समाज को विभाजित करने वाली मानसिकता” बताया है।
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इतिहास की पर्याप्त जानकारी नहीं है और उनके विचार समाज को तोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी की मानसिकता ब्रिटिश सोच से मेल खाती है, जो जातियों और समाज को तोड़ने की प्रवृत्ति रखती है।”
बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने राहुल गांधी के लेख की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “मुझे आश्चर्य होता है कि एक राष्ट्रीय दल का नेता ऐसी हल्की और मूर्खतापूर्ण बातें कैसे कर सकता है।” उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उनका बयान ऐतिहासिक तथ्यों के उलट है और राजपूत समाज का अपमान है।
उन्होंने कहा कि भारत के एकीकरण में राजपरिवारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देश की स्वतंत्रता के समय भारत में 565 रियासतें थीं, जिनके पास लाखों एकड़ जमीन थी। अगर इन रियासतों ने स्वेच्छा से भारत में विलय नहीं किया होता, तो आज का भारत खंडित होता। उन्होंने यह भी कहा कि राजपूत समाज का योगदान सभी भारतीय खुले दिल से स्वीकार करते हैं और राजस्थान में इस समाज का अपमान सहन नहीं किया जाएगा।
राजपूत समाज की नाराजगी
राजस्थान के राजपूत समाज ने भी राहुल गांधी के लेख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका मानना है कि कांग्रेस नेता का यह बयान उनकी “समाज-विभाजक” मानसिकता को दर्शाता है। समाज के प्रमुख लोगों ने कहा कि राजपूत समाज का स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा योगदान रहा है और इसे नजरअंदाज करना न केवल इतिहास के प्रति अज्ञानता है, बल्कि राजपूतों के गौरव का भी अपमान है।
राज्य के कई राजपूत संगठनों ने भी राहुल गांधी के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है और उन्हें तत्काल माफी मांगने की मांग की है।
केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की तीखी टिप्पणी
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी राहुल गांधी के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस के युवराज की भारतीय इतिहास की समझ “भ्रष्ट और चयनात्मक” है। उन्होंने कहा कि यह हैरान करने वाला है कि जो नेता ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का नेतृत्व कर रहे हैं, वे भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और देश के एकीकरण के तथ्यों को समझने में असमर्थ हैं। शेखावत ने राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर “औपनिवेशिक मानसिकता” रखने का आरोप लगाया और कहा कि वे देश के इतिहास को मुगलों और मुस्लिम आक्रमणकारियों की कहानी तक सीमित मानते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर और अखंड भारत के सपने को साकार करने में पूर्व शाही परिवारों के त्याग और बलिदान का अहम योगदान रहा है। शेखावत का कहना था कि राहुल गांधी के विचारों से देश को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस के भीतर राजपूत नेताओं से उम्मीद
बीजेपी नेता राधा मोहन दास अग्रवाल ने कांग्रेस में मौजूद राजपूत समुदाय के नेताओं से अपील की कि वे राहुल गांधी के इस बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। अग्रवाल ने कहा कि अगर कांग्रेस के राजपूताना परिवारों के सदस्यों में “थोड़ी सी भी आत्मा है” तो उन्हें सामने आकर बताना चाहिए कि राहुल गांधी का बयान सही है या गलत। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि उनका दृष्टिकोण राजपूत समाज के बारे में क्या है और वे अपनी पार्टी के नेताओं के इस प्रकार के बयानों को कैसे देखती है।
राहुल गांधी के लेख से उपजे इस विवाद ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक और टकराव का मोर्चा खोल दिया है। जहां बीजेपी राहुल गांधी के विचारों को “इतिहास के प्रति अज्ञानता” और “समाज-विभाजक” मानसिकता का प्रतीक मान रही है, वहीं कांग्रेस ने अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस विवाद ने राजस्थान के राजपूत समाज को भी आक्रोशित किया है, जो उनके स्वाभिमान और इतिहास पर लगे आरोपों को किसी भी तरह से सहन करने के लिए तैयार नहीं है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से आगामी चुनावों में बीजेपी को एक बार फिर कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल सकता है। वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा कि वह इस विवाद को किस तरह से हल करे ताकि समाज के वर्गों की नाराजगी कम की जा सके।


