मनीषा शर्मा। अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में तीसरे दिन भी 628 रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी रही। हड़ताल के चलते अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। फिलहाल, 52 सीनियर रेजिडेंट और 92 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाला हुआ है। हालांकि, इस स्थिति में भी कुछ डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) में मरीजों की संख्या भी कम देखी गई, और मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
डॉक्टरों की मांग और समस्याएं
रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगें मुख्यतः मूलभूत सुविधाओं से संबंधित हैं। रेजिडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष, डॉ. दिलराज मीना ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टरों को काम करने के दौरान कई बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “रेजिडेंट डॉक्टर चौबीसों घंटे काम करते हैं और जब थोड़ा आराम करने के लिए हॉस्टल जाते हैं, तो वहां भी सुविधाओं की कमी होती है। हॉस्पिटल में न तो उचित रेस्ट रूम हैं, न ही गर्ल्स के लिए चेंजिंग रूम। यहां तक कि पीने का साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है।” डॉ. मीना ने यह भी बताया कि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे, जो सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इमरजेंसी सेवाएं चालू
अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को संभालने की पूरी कोशिश की है। अस्पताल अधीक्षक, डॉ. अरविंद खरे ने कहा कि गंभीर और आपात स्थिति वाले मरीजों के ऑपरेशन लगातार किए जा रहे हैं। सोमवार को लगभग 45 ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए थे। हालांकि, सीमित स्टाफ होने के कारण नियमित सेवाएं बाधित हैं।
मरीजों से मांगी माफी
रेजिडेंट डॉक्टरों ने आमजन और मरीजों से हो रही असुविधा को लेकर माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि हड़ताल उनकी मजबूरी है, क्योंकि उनकी मांगे लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह हड़ताल मरीजों को परेशान करने के लिए नहीं है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और काम के लिए उचित माहौल की मांग को लेकर है।