मनीषा शर्मा। राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों के लिए इस दिवाली पर खुशखबरी लेकर आई है राज्य की भजनलाल सरकार। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के छह लाख कर्मचारियों को दिवाली के अवसर पर तदर्थ बोनस देने की घोषणा की है। इस घोषणा से राज्य के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। खास बात यह है कि इस बोनस का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के पे-मैट्रिक्स में पे लेवल एल-12 या ग्रेड पे-4800 और उससे कम वेतन पा रहे हैं।
बोनस के पात्र कर्मचारी और अधिकतम सीमा
भजनलाल सरकार की इस घोषणा के अनुसार, अधिकतम 6774 रुपये का तदर्थ बोनस कर्मचारियों को प्रदान किया जाएगा। यह बोनस विशेष रूप से उन कर्मचारियों को दिया जाएगा जो निम्न स्तर के वेतन पर कार्यरत हैं। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य निम्न वेतनमान के कर्मचारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिससे वे अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी त्योहार मना सकें।
बोनस वितरण की प्रक्रिया
राज्य सरकार ने इस बोनस के वितरण को दो भागों में बांटा है:
- नकद भुगतान: कुल बोनस राशि का 75% कर्मचारियों को नकद दिया जाएगा, जिससे वे दिवाली के त्योहार का आनंद ले सकें।
- सामान्य प्रावधायी निधि (GPF) में जमा: शेष 25% राशि कर्मचारियों के सामान्य प्रावधायी निधि खाते में जमा की जाएगी। इस प्रक्रिया से सरकार न केवल कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित कर रही है बल्कि उन्हें लंबे समय तक लाभ पहुंचाने का भी प्रयास कर रही है।
राज्य सरकार पर 500 करोड़ रुपये का वित्तीय भार
बोनस देने का यह फैसला भजनलाल सरकार के लिए वित्तीय रूप से भारी साबित हो सकता है। राज्य सरकार पर इस बोनस वितरण से लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। हालांकि, सरकार का मानना है कि राज्य कर्मचारियों की भलाई के लिए यह एक आवश्यक कदम है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार के इस कदम से राज्य के आर्थिक विकास में भी सुधार की संभावना है, क्योंकि इस तरह की योजनाओं से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे अपने कार्यों में अधिक उत्साह दिखाते हैं।
पंचायत समिति और जिला परिषद के कर्मचारियों को भी मिलेगा बोनस
बोनस योजना का लाभ सिर्फ राज्य कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पंचायत समिति और जिला परिषद के कर्मचारी भी उठा पाएंगे। यह निर्णय राज्य सरकार के इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि सरकारी कामकाज के सभी स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारी समान रूप से इस बोनस का लाभ उठा सकें। हालांकि, राज्य सेवा के अधिकारी जैसे कि आईएएस अधिकारी, कैबिनेट सचिव, और सिटी मजिस्ट्रेट इस योजना के अंतर्गत नहीं आएंगे।
बोनस की गणना और पात्रता
राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले इस तदर्थ बोनस की गणना 31 दिन के महीने के आधार पर की जाएगी। यह बोनस 30 दिन की अवधि के लिए ही देय होगा। बोनस गणना में अधिकतम परिलब्धियां 7000 रुपये मानी गई हैं, जिसका अर्थ है कि अधिकतम 6774 रुपये का बोनस ही पात्र कर्मचारियों को मिल सकेगा। जिन कर्मचारियों का वेतन इससे अधिक है, वे इस तदर्थ बोनस के पात्र नहीं होंगे।
राज्य सरकार की घोषणा का असर
राजस्थान सरकार की इस घोषणा के बाद राज्य के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। बोनस की यह घोषणा केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों को दिवाली बोनस देने के निर्णय के ठीक बाद आई है, जिससे राज्य के कर्मचारियों को समान लाभ मिल सके। इस निर्णय का उद्देश्य त्योहार के इस महत्वपूर्ण अवसर पर कर्मचारियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और उनके उत्साह को बनाए रखना है।
तदर्थ बोनस से कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
यह बोनस न केवल कर्मचारियों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, बल्कि इससे उनकी क्रय शक्ति में भी वृद्धि होगी। बोनस के नकद भुगतान से कर्मचारी अपने परिवार के साथ त्योहार को अच्छे से मना सकेंगे और उनके जीवन में खुशहाली आएगी। साथ ही, यह बोनस राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच एक सकारात्मक संबंध बनाने में भी सहायक होगा।
मुख्य बिंदु
- बोनस की अधिकतम राशि: 6774 रुपये
- नकद वितरण: कुल बोनस का 75%
- जीपीएफ में जमा: कुल बोनस का 25%
- लाभार्थी कर्मचारी: राज्य सिविल सेवा नियम, 2017 के पे लेवल एल-12 या ग्रेड पे-4800 और उससे कम के कर्मचारी
- राज्य सरकार पर वित्तीय भार: लगभग 500 करोड़ रुपये
- पात्र नहीं: राज्य सेवा के अधिकारी


