मनीषा शर्मा। जयपुर के पुलिस मुख्यालय में तैनात आईजी मानवाधिकार, आईपीएस किशन सहाय ने सभी धर्मों के भगवान/ईश्वर पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि ईश्वर, अल्लाह, और गॉड जैसी कोई शक्ति नहीं है। उनके अनुसार, इन धार्मिक शक्तियों का अस्तित्व केवल लोगों के भ्रम का हिस्सा है और धर्मग्रंथों में दिए गए वर्णन केवल कल्पना मात्र हैं। सहाय का यह बयान विज्ञान और तकनीकी दृष्टिकोण को अपनाने पर जोर देने के संदर्भ में दिया गया था।
धार्मिक दृष्टिकोण से पिछड़ रहा है भारत
आईपीएस किशन सहाय ने कहा कि भारत में 98% लोग धार्मिक दृष्टिकोण रखते हैं। यहां हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, पारसी, और यहूदी धर्मों के अनुयायी रहते हैं। हालांकि, इसके बावजूद भारत विज्ञान और तकनीक में काफी पिछड़ा हुआ है। उनका कहना है कि देश के युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं क्योंकि रोजगार के अवसर विदेशों में जा रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में भी यह स्पष्ट हो रहा है कि धार्मिक दृष्टिकोण रखने वाले देश तकनीकी रूप से पिछड़ रहे हैं। इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का उपयोग करके हमास को हराया, जबकि इस्लामिक देश, जो अल्लाह पर विश्वास करते हैं, हमास की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
ईश्वर ने भारत को गुलामी से बचाने में कोई मदद नहीं की
आईपीएस सहाय ने अपने बयान में भारत के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अरबी, तुर्क, मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी झेली, लेकिन ईश्वर या अल्लाह ने कोई मदद नहीं की। उनके अनुसार, भगवान ने कभी किसी देश को गुलामी से नहीं बचाया है। यह उन देशों का विज्ञान और तकनीकी कौशल था, जिन्होंने उन्हें गुलामी से मुक्ति दिलाई।
सहाय का कहना है कि इतिहास से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर, अल्लाह, या गॉड जैसी कोई शक्ति नहीं है। जिन देशों के पास उन्नत तकनीक और हथियार हैं, वे ही आगे बढ़ रहे हैं, और यही वह रास्ता है जिसे भारत को भी अपनाना चाहिए।
विज्ञान और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत
किशन सहाय ने कहा कि अगर देश को प्रगति करनी है, तो उसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना होगा। जिन देशों ने विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा दिया है, वे तेजी से प्रगति कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, चीन में 90% लोग भगवान में विश्वास नहीं करते, फिर भी वह देश दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी शक्तियों में से एक बन गया है। इसके विपरीत, भारत में 98% लोग धार्मिक दृष्टिकोण रखते हैं, फिर भी देश में बेरोजगारी और पिछड़ापन बना हुआ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं को विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। धार्मिक आस्था और भगवान पर विश्वास ने कभी किसी देश की उन्नति में मदद नहीं की है। अगर भारत को भविष्य में उन्नति करनी है, तो उसे धर्म के बजाय विज्ञान को प्राथमिकता देनी होगी।
प्रमोशन के बाद से आईपीएस किशन सहाय की नियुक्ति
किशन सहाय एक प्रमोटी आईपीएस अधिकारी हैं, जो 2013 में आईपीएस बने थे। उन्हें 2013 में टोंक जिले का एसपी बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें वहां से हटाकर जीआरपी अजमेर में एसपी के पद पर तैनात किया गया। इसके बाद, उन्हें कुछ समय के लिए एपीओ कर दिया गया था।
सहाय ने सीआईडी सीबी में साढ़े चार साल तक सेवा दी, फिर उन्हें जेल विभाग में स्थानांतरित किया गया। 2020 में उन्हें पुलिस मुख्यालय की आर्म बटालियन में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया, जहां से उन्हें बाद में आईजी के पद पर पदोन्नत किया गया। वर्तमान में, 2023 से वे मानवाधिकार विभाग में आईजी के पद पर कार्यरत हैं।
समाज में बयान के प्रभाव
आईपीएस किशन सहाय के इस बयान ने समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। धार्मिक समूहों में उनके इस बयान की आलोचना हो रही है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले और तर्कवादी इस बयान की सराहना कर रहे हैं। सहाय का यह बयान भारतीय समाज में विज्ञान और धर्म के बीच चल रही बहस को फिर से जीवित कर रहा है।
हालांकि, यह देखना बाकी है कि इस बयान के बाद उनके खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई होती है या नहीं। लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस बयान ने एक नए संवाद को जन्म दिया है, जहां विज्ञान और धर्म के बीच संतुलन की चर्चा हो रही है।
आईपीएस किशन सहाय ने धार्मिक आस्थाओं पर सवाल उठाते हुए विज्ञान और तकनीकी दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि अगर भारत को उन्नति करनी है, तो उसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा और धर्म की काल्पनिक बातों से परे हटना होगा। उनके इस बयान ने समाज में एक नई बहस को जन्म दिया है, जो भविष्य में देश के विकास की दिशा को प्रभावित कर सकती है।