शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने डमी कैंडिडेट्स को रोकने के लिए एक नया कदम उठाया है। अब आयोग प्रतियोगी परीक्षाओं में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत कैंडिडेट्स का वेरिफिकेशन बायोमेट्रिक आधार पर किया जाएगा, जिससे डमी कैंडिडेट्स की पहचान आसानी से हो सकेगी।
कैसे काम करेगा यह बायोमेट्रिक सिस्टम?
RPSC के नए बायोमेट्रिक सिस्टम में उम्मीदवारों का वेरिफिकेशन उनके आधार कार्ड से लिंक होगा। जब भी कैंडिडेट परीक्षा केंद्र पर पहुंचेगा, उसे बायोमेट्रिक मशीन पर अपने थंब इंप्रेशन (अंगूठे का निशान) को स्कैन करना होगा। इसके बाद मशीन उसके आधार कार्ड से जुड़ी सभी जानकारी को सत्यापित करेगी।
इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि जिस कैंडिडेट ने परीक्षा दी है, वही इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में उपस्थित है। यदि कोई डमी कैंडिडेट किसी दूसरे की जगह परीक्षा देने की कोशिश करता है, तो उसका फिंगरप्रिंट आधार डाटा से मेल नहीं खाएगा और तुरंत पकड़ा जाएगा।
केंद्रीय मंत्रालय से मिली मंजूरी
इस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रणाली को लागू करने के लिए RPSC ने इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा था। 18 सितंबर 2023 को मंत्रालय ने RPSC के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिससे आधार कार्ड के जरिए उम्मीदवारों की पहचान सत्यापित करने की अनुमति मिली। यह मंजूरी आधार एक्ट 2016 की धारा 4 और आधार ऑथेंटिकेशन फॉर गुड गवर्नेंस नियम 2020 के तहत दी गई है।
कहां और कैसे लागू होगी यह प्रणाली?
आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि फिलहाल इस प्रणाली को इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान ट्रायल के रूप में लागू किया जाएगा। जब कोई कैंडिडेट इंटरव्यू देने पहुंचेगा, तो उससे बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए फिंगरप्रिंट लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह असली कैंडिडेट ही है।
इसके बाद, इस प्रणाली को सभी भर्ती परीक्षाओं पर लागू किया जा सकता है। इससे परीक्षा में डमी कैंडिडेट्स पर नकेल कसी जा सकेगी, जो परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुँच जाते थे।
डमी कैंडिडेट की समस्या
हाल ही में राजस्थान में पेपर लीक और डमी कैंडिडेट्स की समस्याओं ने RPSC के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी थी। एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने कई डमी कैंडिडेट्स को गिरफ्तार किया था, जिनमें से कुछ तो RAS (राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) की परीक्षा के इंटरव्यू तक पहुंच चुके थे।
उदाहरण के तौर पर, दौसा के एक शिक्षक रोशन लाल मीणा को डमी कैंडिडेट के रूप में गिरफ्तार किया गया था। वह दो बार RAS के प्री और मेन परीक्षा पास कर चुका था और इंटरव्यू तक पहुंचा था, हालांकि वह अंततः फेल हो गया। इसके अलावा, जुलाई 2024 में उदयपुर में एक डमी कैंडिडेट भी पकड़ी गई थी, जिसने फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र के जरिए परीक्षा में भाग लिया था।
RPSC के पूर्व सुधार
RPSC ने पहले भी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई सुधार किए हैं। इनमें वन टाइम रजिस्ट्रेशन के दौरान लाइव फोटो कैप्चर करना, प्रवेश पत्र पर सिक्योरिटी थ्रेड और QR कोड शामिल करना, अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान लेना जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, ओएमआर शीट पर एक पांचवां विकल्प जोड़ा गया है, जिससे नकल और धोखाधड़ी की संभावना को कम किया जा सके। इंटरव्यू के दौरान टोकन सिस्टम से बोर्ड आवंटन किया जाता है, जिससे परीक्षाओं में और अधिक पारदर्शिता आई है।
नए बायोमेट्रिक सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ी?
डमी कैंडिडेट्स की समस्या ने RPSC को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की ओर कदम बढ़ाने पर मजबूर किया। राज्य में पेपर लीक और जालसाजी की घटनाओं के बढ़ने से यह जरूरी हो गया था कि परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए डमी कैंडिडेट्स की पहचान आसान हो जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया में जालसाजी को रोका जा सकेगा। इस नई प्रणाली से RPSC की परीक्षाओं में अनुशासन और पारदर्शिता और अधिक बढ़ेगी।


