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अजमेर दरगाह को महादेव मंदिर घोषित करने की याचिका

अजमेर दरगाह को महादेव मंदिर घोषित करने की याचिका

शोभना शर्मा। देश में धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ज्ञानवापी मस्जिद के बाद अब अजमेर दरगाह को लेकर भी एक मामला चर्चा में है, जिसमें दरगाह को महादेव मंदिर घोषित करने की मांग की गई है। यह याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अजमेर दरगाह का इतिहास बताता है कि यह दरगाह एक समय भगवान श्री संकटमोचन महादेव का मंदिर हुआ करती थी।

यह मामला हाल ही में अजमेर की अदालत में पेश किया गया। याचिकाकर्ता ने ‘Ajmer: Historical and Descriptive’ नामक पुस्तक को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें दरगाह परिसर में मंदिर होने का उल्लेख है। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला उचित अदालत में नए सिरे से पेश किया जाए। अब इस मामले को जिला न्यायाधीश के समक्ष स्थानांतरित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। अगली सुनवाई की तारीख 10 अक्टूबर 2024 तय की गई है।

याचिकाकर्ता का दावा और कोर्ट की प्रतिक्रिया

विष्णु गुप्ता द्वारा प्रस्तुत याचिका में दावा किया गया है कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार अजमेर दरगाह की जमीन पर पहले संकटमोचन महादेव का मंदिर था, जिसे बाद में दरगाह में बदल दिया गया। इसके समर्थन में ‘Ajmer: Historical and Descriptive’ नामक पुस्तक का हवाला दिया गया है, जिसे शारदा हरविलास ने लिखा है।

मामले में सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिका जिस अदालत में दायर की गई थी, वह इसके सुनवाई के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील शशि रंजन ने कोर्ट को सूचित किया कि यह याचिका गलती से सिविल जज, सीनियर डिवीजन के समक्ष दायर की गई थी, जबकि सिविल जज, पश्चिम अजमेर की अदालत के पास इसका अधिकार क्षेत्र है। अब वादी मामले को उचित अदालत में स्थानांतरित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

दरगाह प्रबंधन की प्रतिक्रिया

अजमेर दरगाह के प्रबंधन ने इस याचिका पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरगाह दीवान के पुत्र नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि यह याचिका तथ्यों के विपरीत और मनगढ़ंत इतिहास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दरगाह ख्वाजा साहब हमेशा से सभी धर्मों के लिए आस्था का केंद्र रही है और इसे न केवल मुसलमानों ने बल्कि हिंदू राजाओं और शासकों ने भी सम्मान दिया है। चिश्ती ने कहा कि यह मामला दरगाह की पवित्रता और सांप्रदायिक सौहार्द पर चोट करता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दरगाह ख्वाजा साहब भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां हर धर्म और जाति के लोग आस्था के साथ आते हैं। चिश्ती ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस प्रकार के मुद्दे उठा रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप

दरगाह दीवान के पुत्र नसरुद्दीन चिश्ती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि हर मस्जिद में शिवालय ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दरगाह को लेकर इस तरह के मुद्दे उठाने से केवल सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह याचिका एक व्यक्ति द्वारा देश के धार्मिक सौहार्द को तोड़ने की एक साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

चिश्ती ने यह भी कहा कि भारत सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि दरगाह हमेशा से ही सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रहा है और यहां से हमेशा प्रेम और अमन का पैगाम दिया जाता है। यह याचिका न केवल दरगाह के खिलाफ है, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता पर भी हमला है।

दरगाह प्रबंधन के अन्य बयान

अजमेर दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने भी इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने याचिकाकर्ता विष्णु गुप्ता पर आरोप लगाया कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जिसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों से मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है और यह याचिका उसी कड़ी का हिस्सा है।

सरवर चिश्ती ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतिनिधित्व करती है और यहां हर मजहब के लोग श्रद्धा के साथ आते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई खेल-तमाशा नहीं है और इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक माहौल

इस मामले ने सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि धार्मिक स्थलों पर विवादों को रोका जा सके।

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