शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अब बिना योग्यता के आवेदन करने वाले उम्मीदवारों पर सख्त कार्रवाई करेगा। इसके तहत, आयोग 14 ऐसे कैंडिडेट्स के खिलाफ FIR दर्ज कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने जा रहा है, जिन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत शिक्षा विभाग) की परीक्षाओं में योग्यता के बिना कई विषयों में आवेदन किया था। इन उम्मीदवारों को अब RPSC की भविष्य की भर्ती परीक्षाओं से डिबार करने की भी योजना है।
फर्जी कैंडिडेट्स की पहचान:
अभी तक 2 राज्यों के 14 कैंडिडेट्स की पहचान की गई है। इनमें जयपुर के 5, अलवर के 2, उत्तर प्रदेश के 2, और बांसवाड़ा, चुरू, धौलपुर, पाली और दौसा के एक-एक कैंडिडेट्स शामिल हैं। इन सभी ने 5 से 15 विषयों में आवेदन किए थे, लेकिन इन कैंडिडेट्स की योग्यता इन विषयों के अनुरूप नहीं थी।
क्यों हो रही है यह सख्ती:
RPSC के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि इन फर्जी आवेदनों की वजह से आयोग को परीक्षाएं आयोजित करने में लाखों रुपए का खर्च उठाना पड़ता है। इन उम्मीदवारों में से ज्यादातर परीक्षा में उपस्थित नहीं होते, जिससे आयोग को भारी आर्थिक नुकसान होता है। असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत शिक्षा) परीक्षा में केवल 22% उम्मीदवार ही परीक्षा देने पहुंचे थे, जबकि 37,918 कैंडिडेट्स ने आवेदन किया था।
प्रत्येक अनुपस्थित उम्मीदवार के कारण आयोग को लगभग 400 रुपए प्रति कैंडिडेट का खर्च वहन करना पड़ता है, जिसमें पेपर छपवाना, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, एग्जामिनर की तैनाती आदि शामिल हैं।
कोर्ट में रिपोर्ट और FIR:
RPSC ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 217 के तहत 14 कैंडिडेट्स पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। इन कैंडिडेट्स को न केवल कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें भविष्य की भर्ती परीक्षाओं से भी डिबार किया जाएगा।
सजा और जुर्माने का प्रावधान:
बीएनएस की धारा 217 के तहत अगर कोई व्यक्ति सरकारी विभाग या संवैधानिक संस्था को जानबूझकर झूठी जानकारी देता है, तो उस पर एक साल तक की जेल या 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह सजा दोनों रूपों में भी हो सकती है।
कैसे किया जा रहा है फर्जी आवेदनों की जांच:
मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि कई अभ्यर्थियों ने असिस्टेंट प्रोफेसर एग्जाम के लिए अलग-अलग विषयों में आवेदन किए हैं। कुछ कैंडिडेट्स ने 5 से अधिक फॉर्म भरे हैं, जबकि उनकी योग्यता केवल एक या दो विषयों में ही है। कुछ कैंडिडेट्स ने 15 विषयों के लिए आवेदन किया है, जो स्पष्ट रूप से फर्जी है।
जांच के तहत धर्मेंद्र सिंह खैरवाल, रितु मेथी, मनीष कुमार मीणा, अमित कुमार गुप्ता, अमित कुमार यादव जैसे कैंडिडेट्स के नाम शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से आवेदन किए थे। इन सभी को RPSC की परीक्षाओं से डिबार किया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
RPSC की सख्त नीति:
RPSC अब बेवजह और बिना योग्यता के फॉर्म भरने वालों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। आयोग का उद्देश्य यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगे, जिससे आयोग का समय और धन बर्बाद न हो। इस सख्ती के बाद उम्मीद है कि बिना योग्यता के आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स की संख्या में कमी आएगी और आयोग को बेहतर तरीके से परीक्षाएं आयोजित करने में मदद मिलेगी।
किन कैंडिडेट्स पर हो रही है कार्रवाई:
- धर्मेंद्र सिंह खैरवाल (अलवर)
- रितु मेथी (अलवर)
- मनीष कुमार मीणा (दौसा)
- अमित कुमार गुप्ता (जयपुर)
- अमित कुमार यादव (जयपुर)
- अशोक यादव (जयपुर)
- विक्रम सिंह बैरवा (जयपुर)
- देवकरण मीणा (जयपुर)
- अतुल कुमार (उत्तर प्रदेश)
- साक्षी सिंह (उत्तर प्रदेश)
- अमित पाराशर (धौलपुर)
- विनोद तिर्गर (बांसवाड़ा)
- विकास कुमार (चुरू)
- प्रकाश कुमार (पाली)
आर्थिक नुकसान:
मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि लाखों कैंडिडेट्स के अनुपस्थित रहने के कारण आयोग को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। प्रत्येक कैंडिडेट पर करीब 400 रुपए खर्च होते हैं, जिसमें पेपर छपाई, डिलीवरी, एग्जामिनर की तैनाती, और सेंटर की व्यवस्था शामिल है। ऐसे में फर्जी आवेदनों के कारण आयोग को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।


