मनीषा शर्मा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राजस्थान जैसे बड़े राज्य में और जिलों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि राज्य में लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने छोटे जिलों का प्रयोग शुरू किया था, ताकि लोगों को अपने जिला मुख्यालय या राजधानी पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। इस पहल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अधिक प्रशासनिक सुविधा देने का लक्ष्य था।
छोटे जिलों का प्रयोग
गहलोत ने कहा कि उन्होंने यह प्रयोग इसलिए किया ताकि देखा जा सके कि छोटे जिलों का क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रयोग का अध्ययन किया जाना चाहिए और यदि यह सफल हो तो उसे कायम रखा जाए और बढ़ाया जाए। उन्होंने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हर 40 किलोमीटर पर एक नया जिला है, जो उनकी नीति का हिस्सा है। राजस्थान में भी इसी तरह की नीति अपनाई जा सकती है ताकि लोगों को दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की जरूरत न पड़े। गहलोत ने बताया कि राजस्थान में रेगिस्तान और दूर-दूर बसे गांव हैं, जहां प्रशासनिक इकाइयों की संख्या बढ़ाने से जनता को राहत मिलेगी। ज्यादा जिलों का गठन जनता के लिए सुविधाजनक होगा और इससे राज्य की प्रशासनिक क्षमता भी बढ़ेगी।
छोटे जिलों का महत्व
गहलोत के अनुसार, ज्यादा जिलों का मतलब है कि जनता को अपने कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और प्रशासनिक इकाइयां जनता के नजदीक होंगी। उन्होंने कहा कि जनता को राजधानी या जिला मुख्यालयों तक पहुंचने में जो कठिनाई होती है, वह छोटे जिलों के गठन से हल हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक इकाइयों की संख्या बढ़ने से जनता को कई लाभ मिलेंगे, जैसे बेहतर सेवा और त्वरित न्याय।
भाजपा का विरोध
गहलोत के इस विचार पर भाजपा नेताओं ने विरोध जताया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने जरूरत से ज्यादा जिलों का गठन किया था। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहीं ऑफिस खोलने चाहिए। शर्मा के अनुसार, सरकार को नए जिलों के गठन से पहले गहन विचार-विमर्श करना चाहिए था।
हरियाणा में कांग्रेस की बढ़त
गहलोत ने हरियाणा चुनावों पर बात करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस का अच्छा माहौल है और पार्टी को एकतरफा जीत मिल रही है। उन्होंने कहा कि सभी नेता एकजुट होकर काम कर रहे हैं, जिससे पार्टी को मजबूती मिलेगी।
राहुल गांधी पर टिप्पणियों पर नाराजगी
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, वह निंदनीय है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह उम्मीद नहीं थी कि सरदार बेअंत सिंह के पोते से ऐसी बातें सुनने को मिलेंगी, जिन्होंने आतंकवाद से लड़ते हुए अपनी जान दी थी। गहलोत ने कहा कि इस तरह की भाषा का उपयोग करना किसी को अधिकार नहीं है और भाजपा के शीर्ष नेताओं, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, और जेपी नड्डा को इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई बयान नहीं आया है।
महात्मा गांधी की हत्या से पहले का माहौल
गहलोत ने कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी की हत्या से पहले हिंसा का माहौल बनाया गया था, वैसा ही माहौल आज भी देश में बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे लोगों को इस पर जवाब देना चाहिए और यह हिंसा किसी भी तरह से सही नहीं ठहराई जा सकती।
अशोक गहलोत का मानना है कि राजस्थान जैसे बड़े राज्य में और अधिक जिलों की जरूरत है। छोटे जिलों के प्रयोग को सफल बनाने के लिए इसका अध्ययन करवाना जरूरी है। गहलोत ने प्रशासनिक सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अधिक जिलों के गठन से जनता को राहत मिलेगी और राज्य की प्रशासनिक क्षमता में सुधार आएगा। वहीं, भाजपा ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि नए जिलों के गठन पर सरकार को विचार करना चाहिए था।


