शोभना शर्मा। जयपुर हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर को राजस्थान सरकार ने रिश्वत मामले में एक बार फिर से सस्पेंड कर दिया है। यह तीसरा मौका है जब उन्हें निलंबित किया गया है। इस बार सस्पेंशन की वजह यह रही कि मेयर मुनेश गुर्जर ने सरकार द्वारा जारी नोटिस का निर्धारित समय (21 सितंबर 2024) तक जवाब नहीं दिया था। इसके बाद सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर 23 सितंबर को निलंबन आदेश जारी कर दिया।
सरकार ने इस मामले में सबसे पहले 11 सितंबर को मेयर को नोटिस जारी किया था, जो जांच अधिकारी द्वारा भेजा गया था। इस नोटिस का जवाब मेयर ने अपने एडवोकेट के माध्यम से तीन दिन बाद पेश किया था। फिर, 18 सितंबर को स्वायत्त शासन विभाग ने दूसरा नोटिस जारी कर 21 सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया। हालांकि, 21 सितंबर रात 11 बजे तक मेयर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
मुनेश गुर्जर का तीसरा निलंबन
यह तीसरी बार है जब गहलोत सरकार ने मेयर मुनेश गुर्जर को सस्पेंड किया है। इससे पहले 5 अगस्त 2023 और फिर 26 सितंबर 2023 को उन्हें निलंबित किया गया था। दोनों बार उन्होंने सरकार के इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें राहत मिल गई थी और वे फिर से मेयर के पद पर लौट आई थीं।
कोर्ट में 2 सप्ताह बाद सुनवाई
रिश्वतखोरी के मामले में जयपुर हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर के खिलाफ एसीबी (Anti-Corruption Bureau) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने के लिए मेयर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर कोर्ट में 2 सप्ताह बाद सुनवाई होगी। मेयर की ओर से 21 सितंबर को कोर्ट में बहस के लिए समय मांगा गया था। उनके वकील दीपक चौहान ने कोर्ट को बताया कि एसीबी ने चालान पेश कर दिया है, और संबंधित दस्तावेज भी कोर्ट में जमा कराए जा चुके हैं। इस आधार पर बहस के लिए समय देने की अपील की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
एसीबी ने 19 सितंबर 2024 को मेयर मुनेश गुर्जर के खिलाफ रिश्वत मामले में चालान पेश किया था। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के अनुसार, रिश्वतखोरी के इस मामले में मेयर की संलिप्तता की बात सामने आई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।


