मनीषा शर्मा। राजस्थान संघ ने वरिष्ठ शिक्षक और कर्मचारी नेता शम्भू सिंह मेड़तिया के निलंबन को अनुचित बताया है। महासंघ के जोधपुर जिला अध्यक्ष विनोद रतनू ने इस कार्रवाई को विभाग के द्वेषपूर्ण रवैये का परिणाम करार दिया है, जिससे शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग गया है।
विनोद रतनू ने कहा कि मेड़तिया का निलंबन केवल इसलिए किया गया ताकि उन्हें शिक्षक दिवस पर राज्य स्तर पर सम्मानित होने से रोका जा सके। यह दुखद है कि एक वरिष्ठ नेता को इस तरह के अनुचित कारणों से निलंबित किया गया है। उन्होंने इस निलंबन को हैरान करने वाली कार्रवाई बताया और कहा कि इससे न केवल मेड़तिया की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है, बल्कि विभाग की इमेज भी प्रभावित हुई है।
विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया में खामियों का जिक्र करते हुए रतनू ने बताया कि शिक्षक सम्मान के लिए चयन की प्रक्रिया में भी दोष है। शिक्षकों को सम्मान प्राप्त करने के लिए स्वयं आवेदन करना पड़ता है, और फिर भी यदि विभाग द्वेषता के कारण किसी योग्य शिक्षक को सम्मान से वंचित करता है, तो यह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विभाग की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचती है।
रतनू ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ मेड़तिया का मामला नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की प्रतिष्ठा का सवाल है।
ज्ञापन देने के अवसर पर कई अन्य कर्मचारी नेता भी उपस्थित रहे, जिनमें चंद्रशेखर शर्मा, उमेश शर्मा, ओम प्रकाश गुर्जर, अशोक चौधरी, वीरेन्द्र सिंह चारण, रणजीत सिंह चारण, महेश गौड़, महेश शर्मा, बछराज सिंह, महेंद्र बिश्नोई, महावीर भाट, आनंद लुनिवाल, सुरेंद्र चौधरी, राजकुमार गर्ग, प्रवीण मीणा, और हरिशंकर रेगर शामिल थे।


