शोभना शर्मा, अजमेर। राजस्थान के मसूदा उपखंड में स्थित देवमाली गांव को देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है। गुरुवार शाम को यह अवार्ड जारी हुआ, और 27 नवंबर को दिल्ली में इसे औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में उन गांवों को शामिल किया गया, जो न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और सामाजिक जीवन को भी बनाए हुए हैं। इस प्रतियोगिता में देवमाली ने सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया।
देवमाली गांव की खासियत यह है कि यहां लगभग 3,000 बीघा जमीन भगवान श्री देवनारायण के नाम पर है। इसी वजह से इस गांव में किसी के पास जमीन के नाम का पट्टा नहीं है। यह गांव गुर्जर समाज के आराध्य देव भगवान देवनारायण का पवित्र स्थल है, और यहां का सुप्रसिद्ध मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
देवमाली गांव का वास्तविक ग्रामीण जीवन और यहां की सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए पर्यटन मंत्रालय को एक डॉक्यूमेंट्री भेजी गई थी। यह डॉक्यूमेंट्री तत्कालीन उपखंड अधिकारी भरत राज गुर्जर के निर्देशन में बनाई गई थी। कलेक्टर उत्सव कौशल द्वारा इसे रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। इस डॉक्यूमेंट्री में गांव की अनूठी परंपराएं, ग्रामीण जीवन और पर्यटन की संभावनाओं को दर्शाया गया था। जनवरी 2024 में यह डॉक्यूमेंट्री मंत्रालय को भेजी गई थी, और इसी के आधार पर देवमाली गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में चुना गया।
गांव की पारंपरिक सुंदरता और विशेषताएं:
देवमाली गांव, जो राजस्थान के अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक जीवन शैली के लिए प्रसिद्ध है। गांव के सभी मकान आज भी मिट्टी से बने हैं, जिनकी छतों पर परंपरागत रूप से केलू का उपयोग किया जाता है। यहां नीम की लकड़ी जलाने और केरोसिन के उपयोग पर पाबंदी है। इसके अलावा, गांव के लोग आज भी शराब और नॉनवेज से दूर रहते हैं। गांव की यह सादगी और पर्यावरण संतुलन की भावना इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाती है।
यह गांव गुर्जर समाज के आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां भगवान देवनारायण का सुप्रसिद्ध मंदिर स्थित है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, जिनकी भगवान से गहरी श्रद्धा और आस्था है। इसके अलावा, देवमाली गांव में जॉली एलएलबी-3 की शूटिंग भी हो चुकी है, जो यहां की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है।
धार्मिक मान्यता और परंपरा:
देवमाली गांव की धार्मिक मान्यताएं भी इसे अन्य गांवों से अलग बनाती हैं। मान्यता है कि भगवान देवनारायण इस गांव में पहाड़ी पर स्थित मंदिर में कुछ समय के लिए रहे थे। उस समय गांव के गुर्जर समाज के लोगों ने भगवान से कहा था कि वे कच्चे घरों में रहेंगे, जबकि भगवान पक्के घर में रहेंगे। इसी वचन का पालन करते हुए आज तक गांव के लोग कच्चे मकानों में ही रहते हैं और सीमेंट या बजरी का उपयोग नहीं करते। हालांकि, घरों में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन लोग पीली मिट्टी, पत्थर और परंपरागत सामग्री का ही उपयोग करते हैं। गांव में केवल सरकारी भवन और मंदिर पक्के हैं, बाकी सभी मकान कच्चे ही हैं।
देवमाली के पर्यटन की संभावनाएं:
देवमाली गांव की पारंपरिक जीवन शैली, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व इसे एक उत्कृष्ट पर्यटन स्थल बनाते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की सादगी के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर की अनूठी झलक मिलती है। पर्यटक यहां की मिट्टी से बने मकान, केलू की छत, और पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता को देखकर प्रभावित होते हैं।
इसके अलावा, भगवान देवनारायण का मंदिर धार्मिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और इस स्थान की पवित्रता का अनुभव करते हैं। गांव की शांतिपूर्ण और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को मानसिक शांति और एक अलग अनुभव प्रदान करता है।
देवमाली का चयन देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में होना इस बात का प्रमाण है कि यह गांव न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजे हुए है, बल्कि इसे पर्यटन के रूप में भी उभरने का अवसर प्राप्त हो रहा है। ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में इस गांव का भविष्य उज्ज्वल है, और आने वाले समय में यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा।