शोभना शर्मा, अजमेर। अजमेर में स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में 814वें उर्स के आयोजन को लेकर तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। उर्स के मौके पर देश और दुनिया से लाखों जायरीन अजमेर शरीफ पहुंचते हैं और ख्वाजा साहब की दरगाह में मत्था टेककर अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगते हैं। इस साल भी उर्स को लेकर दरगाह परिसर में विशेष इंतजाम किए गए हैं और जायरीन के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। उर्स की शुरुआत से पहले दरगाह प्रशासन ने साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल और व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया है। अजमेर शहर में भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर होगी पेश
814वें उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजी जाने वाली चादर 22 दिसंबर को दरगाह अजमेर शरीफ में पेश की जाएगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू प्रधानमंत्री की चादर लेकर अजमेर पहुंचेंगे। परंपरा के अनुसार, वे बलंद दरवाजे से दरगाह में प्रवेश कर चादर पेश करेंगे। चादरपोशी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी पढ़कर सुनाया जाएगा, जिसमें देश में अमन-चैन, आपसी सौहार्द और भाईचारे की कामना का संदेश होगा। प्रधानमंत्री की ओर से हर साल उर्स के अवसर पर चादर भेजने की परंपरा रही है, जिसे दरगाह में विशेष सम्मान के साथ पेश किया जाता है। प्रधानमंत्री की चादर पेशी को लेकर दरगाह प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए हैं। मंत्री किरण रिजिजू के कार्यक्रम को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
24 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी करेगी चादर पेश
उर्स के दौरान कांग्रेस पार्टी की ओर से भी परंपरागत रूप से दरगाह अजमेर शरीफ में चादर पेश की जाएगी। कांग्रेस की चादर 24 दिसंबर को अकीदत और सम्मान के साथ चढ़ाई जाएगी। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बलंद दरवाजे से दरगाह में प्रवेश कर चादर पेश करेगा। कांग्रेस की ओर से चादरपोशी के दौरान देश में शांति, सांप्रदायिक सौहार्द, लोकतंत्र की मजबूती और आम लोगों की खुशहाली के लिए दुआ मांगी जाएगी। पार्टी स्तर पर चादर पेशी को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और स्थानीय कांग्रेस नेताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पाकिस्तान से नहीं आएंगे जायरीन, बढ़ाई गई सुरक्षा
इस बार उर्स के दौरान एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और ऑपरेशन सिंदूर तथा पहलगाम जैसी घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के चलते इस बार पाकिस्तान से आने वाले जायरीन के उर्स में शामिल न होने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर हर साल बड़ी संख्या में पाकिस्तानी जायरीन अजमेर शरीफ दरगाह में उर्स के दौरान शिरकत करते हैं, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी लगभग तय मानी जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है।
दरगाह और शहर में कड़ी निगरानी
उर्स के दौरान दरगाह परिसर, आसपास के इलाकों और अजमेर शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। जिला प्रशासन का कहना है कि उर्स शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। प्रशासन, दरगाह कमेटी और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से जायरीन को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।
अमन और भाईचारे का पैगाम देता है उर्स
अजमेर शरीफ का उर्स सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह पूरी दुनिया को अमन, मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देता है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह हमेशा से सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र रही है। 814वें उर्स के मौके पर भी यही उम्मीद की जा रही है कि यह आयोजन आपसी भाईचारे और शांति का मजबूत संदेश देगा।


