मंगलवार सुबह राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में उस समय हड़कंप मच गया, जब कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। न्यायिक कार्य शुरू होने से पहले हाईकोर्ट प्रशासन को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें 12 बजकर 20 मिनट से पहले परिसर खाली नहीं करने पर बम धमाकों की चेतावनी दी गई थी। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और एहतियातन कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आमजन की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विनीत बंसल ने बताया कि ईमेल की गंभीरता को देखते हुए मानक सुरक्षा प्रक्रिया के तहत तत्काल कदम उठाए गए। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया तथा पूरे परिसर की सघन तलाशी ली गई। किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचाव के लिए कोर्ट भवन और आसपास के क्षेत्रों को अस्थायी रूप से सील किया गया।
सघन तलाशी के बाद स्थिति सामान्य
धमकी भरे ईमेल के मद्देनजर कोर्ट परिसर में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रत्येक कक्ष, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग क्षेत्र और सार्वजनिक स्थलों की बारीकी से जांच की। तय मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संदिग्ध वस्तुओं की भी जांच की गई। कई घंटों की तलाशी के बाद किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली।
स्थिति सामान्य पाए जाने पर न्यायिक कार्य को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। सुबह लगभग साढ़े 11 बजे के बाद अदालतों में सुनवाई शुरू हुई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने अधिवक्ताओं और वादकारियों के बीच चिंता का माहौल बना दिया।
न्यायिक कार्य में देरी और प्रशासनिक सख्ती
हाईकोर्ट में बम धमकी के कारण कार्यवाही में विलंब की सूचना जारी की गई थी। इसी बीच संजय प्रकाश शर्मा, जो कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं, अचानक जोधपुर जिला न्यायालय परिसर के औचक निरीक्षण पर पहुंच गए। यह निरीक्षण सुबह करीब 11 बजे किया गया, जब कई न्यायिक अधिकारी अपने कक्षों में अनुपस्थित पाए गए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल रिपोर्ट तलब की। न्यायालयीन कार्य में देरी और अनुपस्थिति को प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर माना गया। इसके बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ न्यायिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा, यानी एपीओ में रखने के आदेश जारी किए।
एपीओ किए गए अधिकारियों की सूची
एपीओ किए गए अधिकारियों में जोधपुर महानगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा, विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 की न्यायाधीश मनीषा चौधरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-2 मनीषा शर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नेहा शर्मा, वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करुणा शर्मा, अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 प्रवीण चौधरी, अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-9 सीमा सांदू तथा अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-7 मनोज जीनगर शामिल हैं।
इन अधिकारियों को प्रशासनिक आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायिक अनुशासन को लेकर हाईकोर्ट प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है।
सुरक्षा और न्यायिक अनुशासन पर बड़ा संदेश
एक ही दिन में दो महत्वपूर्ण घटनाएं—बम धमकी और औचक निरीक्षण—ने न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और अनुशासन दोनों पर ध्यान केंद्रित किया है। जहां एक ओर धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा ली, वहीं दूसरी ओर निरीक्षण ने न्यायिक अधिकारियों की जवाबदेही को रेखांकित किया।
सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि धमकी भरे ईमेल के स्रोत की जांच की जा रही है। साइबर सेल की मदद से ईमेल की ट्रैकिंग की प्रक्रिया जारी है, ताकि जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


