मनीषा शर्मा। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान के कारण कब्ज एक आम समस्या बन चुकी है। पाचन तंत्र कमजोर होने से न केवल पेट भारी रहता है बल्कि इसका असर पूरे शरीर की ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसे में प्रोबायोटिक ड्रिंक एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं जो पर्याप्त मात्रा में लेने पर शरीर को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। इन्हें अक्सर “गुड बैक्टीरिया” कहा जाता है क्योंकि ये आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है, कब्ज की समस्या कम होती है और इम्युनिटी भी मजबूत होती है।
आइए जानते हैं घर पर बनने वाले ऐसे 5 प्रोबायोटिक ड्रिंक, जो कब्ज से राहत दिलाने के साथ आंतों को भी स्वस्थ रखते हैं।
1. घर का बना केफिर
केफिर एक पारंपरिक फर्मेन्टेड दूध पेय है जिसमें लैक्टोबैसिलस और बिफीडोबैक्टीरियम जैसे लाभकारी बैक्टीरिया पाए जाते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, केफिर न केवल लैक्टोज पचाने में मदद करता है बल्कि यह जठरांत्र संक्रमण को भी कम कर सकता है।
बनाने की विधि:
ताजे दूध में केफिर के दाने डालें।
इसे ढककर रातभर के लिए छोड़ दें ताकि यह फर्मेन्ट हो जाए।
अगली सुबह इसे छानकर फ्रिज में रख दें और ठंडा पीएं।
नियमित सेवन कब्ज को कम करता है और आंतों की सूजन को भी घटाता है।
2. क्लासिक कोम्बुचा
कोम्बुचा एक खट्टा-मीठा फर्मेन्टेड चाय पेय है, जिसे SCOBY (Symbiotic Culture of Bacteria and Yeast) के माध्यम से तैयार किया जाता है। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, कोम्बुचा में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन और इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं।
बनाने की विधि:
काली चाय बनाकर उसमें चीनी मिलाएं।
इसमें SCOBY डालें और 7–10 दिनों तक फर्मेन्ट होने दें।
तैयार पेय को छानकर ठंडा करें और पिएं।
यह पेय आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का स्तर बढ़ाता है और कब्ज की समस्या में राहत देता है।
3. फर्मेन्टेड छाछ
भारतीय रसोई का एक पारंपरिक और बेहद आसान प्रोबायोटिक ड्रिंक है छाछ। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, छाछ आंतों के जीवाणुओं को सक्रिय करती है और पाचन तंत्र को संतुलित बनाती है।
बनाने की विधि:
दही को पानी के साथ अच्छे से फेंट लें।
इसमें एक चुटकी सेंधा नमक और भुना जीरा पाउडर डालें।
ठंडा परोसें।
छाछ न केवल कब्ज से राहत देती है बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाती है।
4. चुकंदर कांजी
चुकंदर कांजी उत्तर भारत का एक पारंपरिक फर्मेन्टेड पेय है। यह न केवल स्वाद में खट्टा-मीठा होता है बल्कि इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोबायोटिक्स भी पाए जाते हैं।
बनाने की विधि:
चुकंदर को छीलकर स्लाइस में काट लें।
इसमें सरसों का पाउडर और नमक मिलाएं।
इसे पानी में डालकर 3–4 दिन धूप में रखें।
जब यह खट्टा स्वाद देने लगे, तब पीने के लिए तैयार है।
राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र (NCBI) के शोध बताते हैं कि फर्मेन्टेड सब्जियां आंतों के बैक्टीरिया को बढ़ाती हैं, जिससे कब्ज और पाचन संबंधी समस्याएं कम होती हैं।
5. जिंजर बग सोडा
जिंजर बग एक प्राकृतिक स्टार्टर है जिसमें अदरक, बैक्टीरिया और यीस्ट के मेल से प्रोबायोटिक कल्चर विकसित होता है। इससे बना सोडा नैचुरल, झागदार और आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
बनाने की विधि:
कद्दूकस किया हुआ अदरक, चीनी और पानी मिलाकर जार में भरें।
इसे ढककर 5 दिनों तक फर्मेन्ट होने दें।
तैयार होने पर इसे किसी भी फल के रस में मिलाकर दोबारा फर्मेन्ट करें।
कुछ ही दिनों में एक नैचुरल और हेल्दी सोडा तैयार हो जाएगा जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करेगा।
कब्ज जैसी समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह पाचन तंत्र पर गहरा असर डालती है। दवाइयों की बजाय अगर प्राकृतिक उपाय अपनाए जाएं तो शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के आराम मिल सकता है।
घर पर बने केफिर, कोम्बुचा, छाछ, चुकंदर कांजी और जिंजर बग सोडा जैसे प्रोबायोटिक ड्रिंक न केवल कब्ज से राहत दिलाते हैं बल्कि आंतों की सेहत और इम्युनिटी को भी मजबूत बनाते हैं। इनका नियमित सेवन संतुलित जीवनशैली और हेल्दी पाचन के लिए एक बेहतर विकल्प है।


