स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के सामने अक्सर यह दुविधा रहती है कि अपने फोन को किस नेटवर्क मोड पर सेट किया जाए। वर्तमान समय में 2G और 3G नेटवर्क लगभग समाप्त हो चुके हैं और उनके स्थान पर 4G, LTE और 5G ने जगह ले ली है। मोबाइल सेटिंग्स में आज भी कई तरह के विकल्प उपलब्ध होते हैं, लेकिन यदि फोन गलत नेटवर्क मोड पर सेट हो, तो न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड प्रभावित होती है, बल्कि कॉल क्वालिटी भी खराब होने लगती है। इतना ही नहीं, बार-बार नेटवर्क खोजने के कारण फोन की बैटरी असामान्य रूप से तेजी से खत्म होने लगती है। इसलिए यह समझना बेहद आवश्यक है कि आपकी जरूरत और आपके क्षेत्र में उपलब्ध नेटवर्क के आधार पर कौन-सा मोड आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
भारत में 4G और LTE अभी भी सबसे ज्यादा स्थिर और व्यापक रूप से उपलब्ध नेटवर्क माने जाते हैं। जिन उपभोक्ताओं को अत्यधिक तेज इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती या जिन क्षेत्रों में 5G की कवरेज सीमित है, उनके लिए 4G और LTE सर्वोत्तम विकल्प बन जाते हैं। इन मोड पर फोन को 20 से 100 Mbps तक की स्थिर इंटरनेट स्पीड मिल सकती है, जो एचडी वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया उपयोग और सामान्य इंटरनेट ब्राउजिंग के लिए पर्याप्त होती है। इसके अतिरिक्त, यह मोड फोन की बैटरी को अधिक सुरक्षित रखता है क्योंकि डिवाइस को लगातार हाई-फ्रीक्वENCY नेटवर्क खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
जिन उपयोगकर्ताओं के फोन का उपयोग मुख्य रूप से ब्राउजिंग, सोशल मीडिया, म्यूजिक, वीडियो स्ट्रीमिंग और नियमित कॉलिंग के लिए होता है, उनके लिए 4G या LTE एक विश्वसनीय विकल्प साबित होता है। यह नेटवर्क शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अधिक स्थिरता प्रदान करता है। साथ ही कॉल ड्रॉप होने की संभावना भी कम रहती है, क्योंकि फोन लगातार नेटवर्क स्विचिंग नहीं करता।
दूसरी ओर 5G उन उपयोगकर्ताओं के लिए है जो सुपरफास्ट इंटरनेट की आवश्यकता रखते हैं। 5G इंटरनेट, 4G की तुलना में कई गुना तेज है। यदि उपयोगकर्ता ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां 5G सिग्नल मजबूत हैं और पूरे समय उपलब्ध रहते हैं, तो वे अपने फोन को 5G On या 5G Only मोड पर सेट कर सकते हैं। इस मोड में उपयोगकर्ता को 500 Mbps से 1 Gbps तक की गति मिल सकती है, जो बड़े फाइल डाउनलोड, अल्ट्रा एचडी वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए उपयुक्त है।
हालांकि, 5G On मोड की एक बड़ी कमी यह है कि यदि उपयोगकर्ता ऐसे स्थान पर चले जाएं जहां 5G सिग्नल कमजोर है या बिल्कुल नहीं है, तो फोन ‘नो सर्विस’ स्थिति में जा सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस मोड में फोन केवल 5G नेटवर्क को स्वीकार करता है और अन्य नेटवर्क में स्विच नहीं करता। इससे कॉल ड्रॉप होने की संभावना बढ़ जाती है और नेटवर्क न मिल पाने की स्थिति में फोन बैटरी का अत्यधिक उपयोग करता है।
यही कारण है कि 5G Auto मोड को अधिक संतुलित माना जाता है। इस मोड में फोन उपलब्ध नेटवर्क के आधार पर स्वयं को 4G और 5G के बीच स्विच करता है। इससे फोन को लगातार हाइ-फ्रीक्वेंसी सिग्नल तलाशने की आवश्यकता नहीं पड़ती और बैटरी की खपत भी कम हो जाती है। यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त है जिनके क्षेत्र में 5G उपलब्ध तो है, लेकिन सभी स्थानों पर समान शक्ति के साथ नहीं। साथ ही वे तेज इंटरनेट का लाभ भी उठाना चाहते हैं, लेकिन फोन को बार-बार चार्ज नहीं करना चाहते।
नेटवर्क मोड बदलने की प्रक्रिया भी आसान है। iPhone उपयोगकर्ता मोबाइल सर्विस में जाकर मोबाइल डेटा ऑप्शन चुन सकते हैं, जहां वे वॉइस एंड डेटा में जाकर अपने पसंदीदा नेटवर्क मोड का चयन कर सकते हैं। वहीं Android उपयोगकर्ता सेटिंग में जाकर सिम और मोबाइल नेटवर्क के सेक्शन में प्रवेश कर नेटवर्क मोड का चुनाव कर सकते हैं।
कुल मिलाकर कहा जाए तो सही नेटवर्क मोड का चयन उपयोगकर्ता की जरूरत, क्षेत्र की नेटवर्क उपलब्धता और फोन की बैटरी बैकअप पर निर्भर करता है। उपयोगकर्ता यदि सामान्य उपयोगकर्ता हैं तो 4G या LTE पर्याप्त है, जबकि उच्च स्पीड इंटरनेट के लिए 5G On या 5G Auto मोड समझदारी से चुना जा सकता है। सही मोड न केवल इंटरनेट अनुभव को बेहतर बनाता है, बल्कि फोन की बैटरी और प्रोसेसर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।


