latest-newsझालावाड़राजनीतिराजस्थान

झालरापाटन के द्वारिकाधीश मंदिर में 40 दिन का फागोत्सव

झालरापाटन के द्वारिकाधीश मंदिर में 40 दिन का फागोत्सव

राजस्थान के झालरापाटन शहर में स्थित द्वारिकाधीश मंदिर इन दिनों रंग और भक्ति के अनूठे संगम का साक्षी बना हुआ है। बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर दुल्हेंडी तक चलने वाला 40 दिनों का फागोत्सव यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। फागुन की पहली आहट के साथ ही मंदिर परिसर में अबीर-गुलाल की महक और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। यहां होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति का उत्सव बन जाती है।

रंग और भक्ति का अद्भुत संगम

फागोत्सव के दौरान मंदिर का वातावरण ब्रजधाम की झलक प्रस्तुत करता है। ढोलक की थाप और मंजीरों की खनक पर पारंपरिक फाग गीत गूंजते हैं। महिलाएं विशेष उत्साह के साथ इन कार्यक्रमों में भाग लेती हैं और सामूहिक रूप से भक्ति गीत गाती हैं। गुलाल की उड़ती फुहारों के बीच श्रद्धालु भगवान द्वारिकाधीश के साथ होली खेलने का आध्यात्मिक अनुभव करते हैं। मंदिर का आंगन रंगों से सजा रहता है और हर चेहरा कृष्ण भक्ति में सराबोर दिखाई देता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पावन अवसर पर भगवान के साथ होली खेलने से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन की प्राप्ति होती है। रंगों के माध्यम से प्रेम और एकता का संदेश दिया जाता है। यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं, बल्कि सभी लोग एक समान भाव से उत्सव में सहभागी बनते हैं।

हर दिन विशेष धार्मिक आयोजन

40 दिनों तक चलने वाले इस फागोत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भजन संध्या, फूलों की होली, विशेष श्रृंगार दर्शन और सामूहिक फाग गायन इस उत्सव के प्रमुख आकर्षण हैं। मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें रंग-बिरंगे परिधान और पुष्प सज्जा से विग्रह को सजाया जाता है। श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचकर दर्शन करते हैं और इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनते हैं।

फूलों की होली के दौरान मंदिर परिसर में पुष्प वर्षा होती है और भक्तगण नृत्य करते हुए भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है, जिसमें भक्ति और उल्लास का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों की सहभागिता से वातावरण और भी जीवंत हो उठता है।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

फागोत्सव की एक विशेष पहचान महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। पारंपरिक परिधान धारण कर वे समूह में फाग गीत गाती हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में सहयोग करती हैं। उनकी उपस्थिति से उत्सव में सांस्कृतिक गरिमा और जीवंतता दोनों का समावेश होता है। कई परिवार पीढ़ियों से इस परंपरा का हिस्सा रहे हैं और नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ रहे हैं।

महिलाओं का कहना है कि यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम है। सामूहिक गायन और नृत्य के माध्यम से वे अपनी आस्था को अभिव्यक्त करती हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

झालरापाटन का यह फागोत्सव केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है। स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं। होली यहां केवल रंगों से नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम से खेली जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष यह उत्सव हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और शहर की पहचान बन चुका है।

वरिष्ठ नागरिक बताते हैं कि पहले भी यह आयोजन बड़े उत्साह से मनाया जाता था, हालांकि समय के साथ व्यवस्थाएं आधुनिक हुई हैं। फिर भी मूल भावना और धार्मिक उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। नई पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

द्वारिकाधीश मंदिर का फागोत्सव आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उत्सव भक्तों को भगवान कृष्ण की लीलाओं की स्मृति से जोड़ता है और उन्हें भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश भी देता है।

झालरापाटन शहर के लिए यह आयोजन पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आसपास के जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। फागोत्सव के दौरान शहर में विशेष रौनक रहती है और स्थानीय व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading