शोभना शर्मा। अजमेर जिले के ऐतिहासिक तारागढ़ वन क्षेत्र में हाल ही में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत 213 अवैध रूप से बनाई गई दुकानों को हटाया गया। इस बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई के बाद अब वन विभाग ने पूरे वन क्षेत्र में अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग ने निर्णय लिया है कि तारागढ़ क्षेत्र में चार अस्थायी चौकियां स्थापित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को समय रहते रोकना होगा।
वन विभाग के अनुसार इन चौकियों में नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों का चयन जल्द किया जाएगा। इसके साथ ही, विभाग एक विशेष निगरानी टीम का गठन करने पर भी विचार कर रहा है जो तारागढ़ सहित जिले के अन्य वन क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखेगी।
अतिक्रमण के बाद नई रणनीति
पिछले शनिवार को वन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में तारागढ़ क्षेत्र की उन दुकानों को ध्वस्त किया गया जो वन भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई थीं। इस क्षेत्र में फिर से अतिक्रमण होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए विभाग अब पूरी रणनीति के साथ काम कर रहा है।
डीएफओ वीरेंद्र सिंह जोय ने बताया कि अतिक्रमण रोकने के लिए बनाई जाने वाली अस्थायी चौकियां पूरी तरह से मजबूत होंगी ताकि किसी भी स्थिति में स्थायी समाधान निकाला जा सके। इसके अतिरिक्त, विभाग वन भूमि की पहचान और सीमांकन के लिए सर्वे करवाएगा, जिससे जमीन पर कब्जा करने वालों की पहचान आसानी से की जा सके।
वन भूमि का सीमांकन और निगरानी
वन विभाग का मुख्य उद्देश्य अब यह है कि पूरी वन भूमि की स्पष्ट सीमाबंदी कर दी जाए। इसके तहत सीमाओं पर पत्थरगड़ी कराई जाएगी ताकि स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों दोनों को यह स्पष्ट रहे कि कौन-सी भूमि वन क्षेत्र में आती है। इससे आने वाले समय में भूमि विवादों से बचा जा सकेगा।
डीएफओ ने बताया कि लेपर्ड सफारी के लिए चिन्हित क्षेत्र के अलावा जो अन्य वन भूमि खाली बचेगी, वहां पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ईको पाइंट विकसित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
मलबा हटाने में चुनौती, फिर होगा टेंडर
अतिक्रमण हटाने के बाद जिस स्थान पर अवैध दुकानें बनाई गई थीं, वहां अब मलबा जमा हो गया है। इस मलबे को हटाना विभाग के लिए चुनौती बन गया है क्योंकि यह क्षेत्र पहाड़ी है और वहां तक वाहन नहीं पहुंच सकते। अब तक तीन एजेंसियां इस काम को करने से मना कर चुकी हैं। डीएफओ ने बताया कि एक बार फिर मलबा हटाने के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। यह अंतिम प्रयास होगा ताकि क्षेत्र को साफ किया जा सके और पर्यावरणीय संतुलन बहाल किया जा सके।
अन्य वन क्षेत्रों पर भी नजर
वन विभाग की यह कार्रवाई केवल तारागढ़ तक सीमित नहीं रहेगी। जिले के अन्य वन क्षेत्रों में भी अतिक्रमण की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी अन्य क्षेत्र में अतिक्रमण पाया जाता है तो वहां भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। कई स्थानों पर भूमि की सटीक जानकारी नहीं होने के कारण अब संयुक्त सर्वे कराने की योजना है, जिसमें प्रशासन, वन विभाग और राजस्व विभाग मिलकर वन भूमि की पहचान करेंगे।
डीएफओ के अनुसार यदि सर्वे के बाद यह स्पष्ट होता है कि किसी वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, तो उसे तुरंत हटाया जाएगा और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।


