मनीषा शर्मा। राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य में 3200 मेगावाट की कोल आधारित विद्युत परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। इस परियोजना में लगभग 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में बड़ा इजाफा होगा।
मुख्यमंत्री के प्रयास रंग लाए
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस परियोजना को लेकर कोयला मंत्रालय और केंद्र सरकार से लगातार संवाद किया था। उन्होंने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहरलाल के समक्ष परियोजना के लाभों का विस्तार से उल्लेख करते हुए राज्य के लिए कोल लिंकेज आवंटन का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राजस्थान की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक बड़े पावर प्रोजेक्ट की तत्काल जरूरत है। उनके इन प्रयासों का ही परिणाम है कि एम्पावर्ड कमेटी ने राजस्थान में इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
राजस्थान पहले ही नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर और पवन ऊर्जा में अग्रणी रहा है। लेकिन बेस लोड की पूर्ति और निरंतर बिजली आपूर्ति के लिए कोयला आधारित परियोजनाओं की आवश्यकता बनी रहती है। इस 3200 मेगावाट के पावर प्लांट के स्थापित होने से राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और अधिक मजबूत होगी। साथ ही, लंबे समय तक औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
40 हजार करोड़ का निवेश और रोजगार
इस परियोजना के तहत होने वाला निवेश करीब 40 हजार करोड़ रुपए का होगा। इससे न केवल राज्य की राजस्व आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और बुनियादी ढांचे का विकास भी होगा।
उद्योग और कृषि क्षेत्र को लाभ
राजस्थान का उद्योग जगत और कृषि क्षेत्र लंबे समय से स्थिर और सस्ती बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे थे। इस पावर प्रोजेक्ट से दोनों क्षेत्रों को मजबूत आधार मिलेगा। निर्बाध बिजली आपूर्ति से छोटे-बड़े उद्योगों का उत्पादन बढ़ेगा, जबकि कृषि क्षेत्र में सिंचाई और उत्पादन की लागत कम होगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना है।
तकनीकी और सामाजिक प्रभाव
यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। परियोजना क्षेत्र में सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास होगा। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
नवीकरणीय ऊर्जा के साथ संतुलन
राज्य सरकार भविष्य की ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और पारंपरिक ऊर्जा दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ यह कोल आधारित परियोजना राज्य की ऊर्जा नीति को संतुलन प्रदान करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दिन-रात, हर मौसम में पर्याप्त बिजली उपलब्ध रहे।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण योगदान देगी। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।


