अजमेर पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो काले रंग के कागजों को असली नोट में बदलने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपए ठगने की तैयारी में था। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों को लालच देकर विश्वास में लेते थे और दावा करते थे कि वे खास केमिकल और प्रक्रिया की मदद से कागज के टुकड़ों को असली मुद्रा में बदल सकते हैं। इस तरह वे भोले-भाले लोगों को फंसाकर उनसे नकद रकम हड़प लेते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपी अपने पास 500-500 रुपए के नोट के आकार में कटे हुए काले रंग के कागजों की कई गड्डियां रखते थे। पहली नजर में ये गड्डियां नोटों की तरह दिखाई देती थीं। जब कोई व्यक्ति इनके संपर्क में आता, तो आरोपी उसे बताते कि उनके पास एक विशेष तकनीक है, जिसके जरिए काले कागजों को असली नोट में बदला जा सकता है। इसके लिए वे एक डेमो भी दिखाते थे, जिससे सामने वाला व्यक्ति आसानी से उनके झांसे में आ जाता था।
ठगों का तरीका बेहद चालाकी भरा था। वे एक असली नोट को पहले से तैयार किए गए केमिकल, जिसे टिंचर बताया जाता था, में डुबोकर काला कर देते थे। फिर एक पतीले में पानी गर्म करते और उस काले पड़े नोट को उसमें डालते। इसके बाद उसमें कास्टिक सोडा जैसे पदार्थ मिलाकर कुछ देर उबालते थे। गर्म पानी और केमिकल के असर से नोट पर चढ़ा काला रंग उतर जाता था और वही असली नोट फिर सामान्य रूप में दिखने लगता था। इसे देखकर लोग विश्वास कर लेते थे कि आरोपी सचमुच कागज को नोट में बदल सकते हैं।
जब कोई व्यक्ति पूरी तरह भरोसा कर लेता था, तब आरोपी उससे कहते थे कि यदि वह एक लाख रुपए देगा तो बदले में उसे तीन लाख रुपए के नोट बना कर दिए जाएंगे। लालच में आकर कई लोग उन्हें असली नकदी दे देते थे। बदले में आरोपी काले कागजों की गड्डियां थमा देते थे और मौके से फरार हो जाते थे। बाद में पीड़ित को पता चलता था कि उसे ठग लिया गया है।
अजमेर पुलिस को इस गिरोह की सूचना मुखबिर के जरिए मिली। जानकारी दी गई कि महाराजा अग्रसेन स्कूल के सामने पटेल स्टेडियम क्षेत्र में तीन युवक नकली नोटों को असली बताकर लोगों को ठगने की फिराक में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही जिला स्पेशल टीम और कोतवाली थाना पुलिस को सक्रिय किया गया। अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई और तुरंत कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीन संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया और पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अजमेर शहर में किसी नए शिकार की तलाश में थे। तलाशी के दौरान उनके पास से काले कागजों की चार गड्डियां बरामद हुईं, जिन्हें नोटों के आकार में काटा गया था। इसके अलावा कास्टिक सोडा, केमिकल की शीशियां, एक मोटरसाइकिल और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। पुलिस का मानना है कि मोबाइल फोन में ठगी से जुड़े वीडियो, संपर्क और अन्य अहम जानकारी मिल सकती है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दूदू निवासी सदीक, जयपुर निवासी सिराजुद्दीन और प्रतापगढ़ निवासी नौसद के रूप में हुई है। पुलिस अब इनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। आशंका है कि यह गिरोह पहले भी राजस्थान के अलग-अलग शहरों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इनके साथ और कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा क्या यह कोई बड़ा नेटवर्क है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाकर ऐसे लोगों को तलाशते थे, जो जल्दी पैसा कमाने के लालच में फंस सकते हों। वे पहले बातचीत कर दोस्ताना माहौल बनाते, फिर अपने पास मौजूद वीडियो दिखाते थे, जिसमें काले कागज से नोट बनाने का कथित तरीका दिखाया जाता था। यदि कोई व्यक्ति वीडियो देखकर भी भरोसा नहीं करता, तो आरोपी मौके पर लाइव डेमो भी करके दिखाते थे।
इस गिरोह की सबसे बड़ी चाल यही थी कि वे पहले से कुछ असली नोट अपने पास रखते थे, जिन्हें केमिकल से काला किया गया होता था। फिर उसी नोट को गर्म पानी में डालकर रंग हटाते और दावा करते कि यह काला कागज था जो नोट बन गया। इस भ्रमजाल में फंसकर लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते थे।
अजमेर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी लालच में न आएं। कोई भी व्यक्ति या गिरोह यदि कम समय में पैसे दोगुने-तीन गुना करने, नकली नोट को असली बनाने या केमिकल से नोट तैयार करने का दावा करता है, तो यह निश्चित रूप से ठगी का मामला हो सकता है। ऐसे लोगों की तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


