latest-newsदेशराजस्थान

SI भर्ती रद्द होने के बाद सरकार के सामने 3 बड़े विकल्प

SI भर्ती रद्द होने के बाद सरकार के सामने 3 बड़े विकल्प

शोभना शर्मा।  राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार दोपहर को SI भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अधर में डाल दिया है। लंबे समय से न्याय की उम्मीद में आंदोलन कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला राहत की खबर बनकर आया, लेकिन राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी।

हाई कोर्ट का फैसला और बढ़ता दबाव

SI भर्ती-2021 में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोप लंबे समय से लगे हुए थे। इसी को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलनरत थे। हाई कोर्ट ने आखिरकार भर्ती को रद्द करने का फैसला सुनाकर युवाओं की मांगों को स्वीकार किया। लेकिन इससे सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है।

भाजपा विपक्ष में रहते हुए इस मुद्दे को लगातार उठाती रही थी और इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था। अब जब वही पार्टी सरकार में है, तो उस पर युवाओं के भरोसे को कायम रखने का दबाव और बढ़ गया है।

सरकार के सामने तीन विकल्प

कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सरकार के पास तीन बड़े विकल्प हैं।

1. फैसले को स्वीकार करना

सरकार चाहे तो हाई कोर्ट के फैसले को मानते हुए SI भर्ती को आधिकारिक रूप से रद्द कर सकती है। यह सबसे सरल विकल्प है, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। फैसले को स्वीकार करने पर सरकार पर नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का दबाव आएगा। इससे समय और संसाधन दोनों की खपत होगी और युवाओं में असंतोष भी बढ़ सकता है।

2. डिवीजन बेंच में अपील करना

अगर सरकार को लगता है कि हाई कोर्ट की एकल पीठ का फैसला सही नहीं है, तो वह डिवीजन बेंच में अपील कर सकती है। यहां बड़ा पीठ मामले की दोबारा सुनवाई करेगा। यह कानूनी प्रक्रिया सामान्य है और अक्सर ऐसे मामलों में अपनाई जाती है। लेकिन इस विकल्प को चुनने पर मामला लंबा खिंच सकता है और युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

3. सुप्रीम कोर्ट जाना

सरकार चाहे तो सीधे सुप्रीम कोर्ट में भी अपील कर सकती है, लेकिन यह अंतिम विकल्प माना जाता है। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब डिवीजन बेंच का फैसला भी सरकार के खिलाफ आता है। सुप्रीम कोर्ट का रास्ता सबसे जटिल और लंबा होगा।

मंत्री का बयान

नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शुक्रवार को कोटा में कहा कि सरकार हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा कर रही है। समीक्षा के बाद जो भी आवश्यक कदम होगा, वह उठाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार यह आकलन भी कर रही है कि क्या अदालत में अपील करना जनहित में होगा या सीधे फैसले को स्वीकार करना ही बेहतर होगा।

DGP और गृह विभाग की भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग की भूमिका सबसे अहम होगी।

  • DGP की भूमिका: सब-इंस्पेक्टर कैडर का नियंत्रण DGP के पास होता है। कोर्ट के आदेश की आधिकारिक जानकारी सरकार तक पहुंचाने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी DGP कार्यालय की होगी। OIC (Officer In Charge) सबसे पहले सरकार को पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे।

  • गृह विभाग की कार्रवाई: DGP कार्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद मामला गृह विभाग तक पहुंचेगा। यहां विधि विभाग कोर्ट के आदेश का परीक्षण करेगा और कानूनी राय देगा। इसी राय के आधार पर सरकार यह तय करेगी कि अपील करनी है या फैसले को स्वीकार करना है।

गृह विभाग से जारी होगा अंतिम आदेश

अगर सरकार अपील नहीं करती तो भर्ती रद्द करने का आदेश गृह विभाग के गृह ग्रुप-1 सेक्शन से जारी किया जाएगा। यह वही सेक्शन है जो स्थापना (Establishment) से जुड़े मामलों को देखता है। वहीं, अगर सरकार अपील करने का निर्णय लेती है तो डिवीजन बेंच में याचिका दायर की जाएगी।

यह आदेश लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करेगा और आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। सरकार का अगला कदम यह तय करेगा कि वह युवाओं का विश्वास कायम रख पाती है या नहीं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading