उधार के 65 हजार लगा दो मजदूरों के साथ रखी थी सपने की नींव आज दो कंपनी खड़ी कर 125 करोड़ टर्नओवर तक पहुंचाया कारोबार

0
23

(प्रवीण शर्मा) मेरी पढ़ाई लिखाई दिल्ली में हुई। पिता बैंक में नौकरी करते थे। घर का माहौल बिल्कुल सामान्य था। वर्ष 1990 में स्नातक कर ली। थोड़े दिनों बाद एक कंपनी में 1400 रुपए की नौकरी शुरु कर परिवार की गाड़ी में सहारा बन गया। कुछ दिन तक सब अच्छा चलता रहा। पिता भी नौकरी में थे तो नौकरी की दिक्कतें भी पता थी। माह के समाप्त होते-होते हालत पतली होने लगती थी। फिर सोच लिया ऐसा मैं नहीं कर सकता। लेकिन करता भी तो क्या? इतनी पूंजी थी कि कोई काम ध्ंधा कर लूं।मेरे अंदर चल रही कसमकश को घरवाले भी जानते थे। लेकिन सोच नहीं पा रहा था कि आखिर इस सबसे आगे कैसे निकला जाए। आखिर एक दोस्त ने एसी का काम करने का सुझाव दिया। छोटा भाई इस बारे में कुछ जानता था। अब दिक्कत पैसे ही हुई। रिश्तेदारों और परिचितों से किसी तरह 65 हजार रुपए एकत्रित कर जुलाई 1997 में दो मजदूरों के साथ दिल्ली के दशरथपुरी में एक छोटा सा प्लांट शुरु कर दिया।यह काम साझे में किया। लेकिन छह माह तक तकनीकी दिक्कतें ही चलती रहीं। आखिर यह काम शुरु होते ही बंद हो गया जो राशि उधार में ली थी वह भी डूब गई। काम बंद तो हुआ, लेकिन उसने एक पाठ पढ़ा दिया। आखिर थोड़े दिन बाद फिर से कहीं से कुछ राशि का प्रबंध कर यह काम शुरु किया। इस बार यह काम चल निकला। काम बढ़ने के साथ आदमियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी।3 साल बाद फिर लगा ब्रेक, लेकिन हिम्मत नहीं हाराअभी सब अच्छा चल रहा था कि वर्ष 2000 में दिल्ली में प्रदूषण के चलते हमारी कंपनी को भी बंद करने के आदेश आ गए। कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें। फिर किसी परिचित ने भिवाड़ी में कंपनी लगाने का सुझाव दिया। थोड़े ही दिनों बाद हमने भिवाड़ी में एक प्लॉट लेकर यहां अपनी कंपनी डाल ली।भिवाड़ी में काम ने हमारा हाथ पकड़ लिया। काम में दिनोंदिन बढ़ोतरी होने लगी। आज दो कंपनियां वेव्स एयरकोन प्राइवेट लिमिटेड और वोल्टर वेंटिलेटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड खड़ी कर ली हैं। दोनों में 400 आदमी काम करते हैं। जिनका टर्न ओवर भी 125 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच गया है।ऑर्डर मिले तो लगा सपना पूरा हो गयाभिवाड़ी में काम शुरु किया तो पहले छोटे-छोटे आर्डर मिलने लगे। फिर एक दिन दिल्ली मेट्रो के थर्ड फेस का काम मिल गया। यह हमारे लिए सपने से कम नहीं था। दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए बने 10 स्टेडियमों का काम भी मैंने ही कराया।दिल्ली और गुवाहाटी एयरपोर्ट तथा देश में बन रहे एम्स में भी काम हमारी ही कंपनी ही कर रही हैं। इसके अतिरिक्त अभी मुंबई मेट्रो का भी 200 करोड़ रुपए का काम मिला है। वहीं कई मॉल्स, स्कूल्स आदि में भी काम किया है। आज कंपनी का पूरे देश में काम चल रहा है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

विजय आनंद, निदेशक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here