हाड़ौती में 1 लाख लोग स्मैक के आदी, इनमें सबसे ज्यादा युवा

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अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर शुक्रवार को वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी, संवेदना सेवा एंड रिसर्च फाउंडेशन और सोसाइटी हैज ईव-सी की ओर से वेबिनार का आयोजन ड्रग एब्यूज एंड इलिसिट ट्रैफिकिंग विषय पर किया। मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि नशे से युुवा पीढ़ी को बचाने के लिए अनेक संस्थाएं कार्य कर रही हैं और कोटा की संस्थाएं विशेषकर अच्छा कार्य कर रही हैं।युवा पीढ़ी को नशे की लत से उबारने में जन-जागरूकता फैलानी होगी। आज नशा और आतंकवाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं और हमें समाज में बदलाव लाने पर ध्यान देना होगा। तकनीकी सत्र में न्यायविद एवं पूर्व लोकायुक्त जस्टिस एसएस कोठारी ने कहा कि नशे से व्यक्ति का शरीर और उसका घर-परिवार सभी बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अमूल्य है और समाज में जन-जागरूकता फैलाकर ही इसे रोका जा सकता है।अध्यक्षता कर रहे वीसी प्रो. आरएल गोदारा ने कहा कि हमें युवाओं की नशे से हो रही बर्बादी को रोकना होगा। तभी सही मायने में न्याय हो सकेगा। फाउंडेशन के डॉ. आरसी साहनी ने कहा कि नशा मुक्ति अभियान में जितने लोग सक्रिय योगदान देंगे, उतनी ही युवा पीढ़ी को उबारने में मदद मिलेगी।विशिष्ट अतिथि सीबीआई के संयुक्त निदेशक डीसी जैन ने कहा कि नशे पर रोक से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, अपराध पर लगाम लगेगी। इसके लिए सभी को प्रयास करने होंगे। डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर विकास जोशी ने कहा कि कई राज्यों से ड्रग की तस्करी ट्रकों के जरिए हो रही है और इसे बहुत योजनाबद्ध तरीकों से अंजाम दिया जा रहा है।विभाग इस पर गंभीरता से रोकथाम के लिए जुटा है। पैसे के चलते नशीली दवाओं और मादक पदार्थों का सारा कारोबार चल रहा है। समन्वयक डॉ. कीर्ति सिंह ने वेबीनार के बारे में बताया। डॉ. अखिलेश कुमार ने वेबीनार होस्ट किया तथा शपथ पत्र जारी किया। संचालन डॉ. क्षमता चौधरी ने किया। आयोजन सचिव डॉ. निधि प्रजापति ने प्रतियोगिता पोस्टर लांचिंग में सहयाेग किया। वीएमओयू के डॉ. राकेश, नीरज, सौरभ, मयंक ने तकनीकी सहयोग किया। इस माैके पर जागरूकता के लिए एक प्रतियोगिता पोस्टर भी लांच किया।भास्कर एक्सपर्ट: नशामुक्ति केंद्र पर रोज आते हैं 200 लोगडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय के मुताबिक, हाड़ौती में सबसे बड़ी चुनौती है-स्मैक। मेरा मानना है कि संभाग में करीब 1 लाख लोग स्मैक के आदी है। इनमें सबसे ज्यादा युवा है। नशे के शिकार लोगों में से हम तक तो बहुत कम पहुंच रहे हैं। हमारे यहां दो सेंटर संचालित है, जहां ऐसे मरीजों को दवा दी जाती है।जहां रोजाना करीब 200 लोग दवा लेने आते हैं। एक सेंटर एमबीएस में संचालित है, जहां इंजेक्टिंग ड्रग यूजर्स (आईयूडी) को प्यूपरी मोर्फिन दवा की टेबलेट्स दी जाती है। वहीं, नए अस्पताल में संचालित नशामुक्ति केंद्र पर स्मैक पीने वालों को मेथाडोन दवा पिलाई जाती है।अब गांवाें से स्मैक की लत के शिकार युवा आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। हाड़ौती में स्मैक का चलन इसलिए भी बढ़ा, क्योंकि यह क्षेत्र अफीम उत्पादक रहा है। हाड़ौती में दूसरे नशे भी प्रचलित है, गांजा, अफीम, भांग और एल्कॉहल जैसे, लेकिन उनकी समस्या उतनी बड़ी नहीं है, जितनी स्मैक पीने वालों की है।
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