पर्यटकों के अभाव में जोधपुर व जैसलमेर का होटल व्यवसाय ठप, फिलहाल उम्मीद भी नहीं आ रही है नजर

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पर्यटकों पर निर्भर जोधपुर व जैसलमेर का होटल व्यवसाय इन दिनों पूरी तरह से ठप है। कोरोना का फैलाव रोकने के लिए लागू लॉक डाउन के कारण पर्यटकों की आवक पूरी तरह से थमी हुई है। अनलॉक के बावजूद पर्यटक आने से कतरा रहे है। वहीं संकट के इस दौर में वंदे मातरम मिशन के तहत विदेश में फंसे भारतीयों को लाने की योजना खटाई में पड़ने से होटल व्यवसायियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस मिशन के तहत विदेश से भारतीय नागरिकों को लाकर जोधपुर व जैसलमेर की होटलों में उनके स्वयं के खर्च पर क्वारैंटाइन किया जाना था। होटल मालिकों में उम्मीद जगी कि कुछ लोगों के ठहरने से काम चल निकलेगा, लेकिन दोनों स्थान पर किसी को लाया ही नहीं गया। देश-विदेश में फिलहाल कोई पर्यटक आ नहीं रहा है। ऐसे में जोधपुर-जैसलमेर की अधिकांश होटलें बंद पड़ी है। इस तरह पर्यटन आधारित काम-धंधे पूरी तरह से ठप पड़े है।वंदे मातरम योजना से जगी उम्मीद पर फिरा पानीकेन्द्र सरकार ने विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को लाने की वंदे मातरम योजना तैयार की थी। इसके तहत जोधपुर व जैसलमेर में 500-500 लोगों को विदेश से लाकर विभिन्न होटलों में क्वारैंटाइन रखने की योजना तैयार की गई थी। इस योजना के तहत जिला प्रशासन ने अलग-अलग श्रेणी की होटलों का चयन कर इन्हें आरक्षित किया था। इन होटलों में ठहरने, खाने पीने की दर भी फिक्स की गई थी, इसका भुगतान भी इन भारतीय नागरिकों को करना था। इसी के तहत जैसलमेर व जोधपुर की अलग-अलग श्रेणी की होटलों को रिजर्व किया था। जिला प्रशासन इन होटल के मालिको के साथ बैठक कर इन्हें एसओपी व गाइडलाइन के बारे में जानकारी दी थी तथा इनके लिए ट्रेनिंग का कार्य भी आयोजित किया था कि किस तरह इन भारतीय नागरिकों को होटलों में ठहराया जाएगा। एक माह से भी ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद ना तो अभी इन तो भारतीय नागरिकों को एयरलिफ्ट करके जैसलमेर व जोधपुर लाया जा सका है।अब कोई जानकारी नहींजैसलमेर जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि राज्य सरकार से मिले निर्देशानुसार प्रवासी विदेशी नागरिकों को राजस्थान में लाने के लिए जैसलमेर का भी चयन किया गया था, यहां पर करीब 500 से ज्यादा भारतीय नागरिको को क्वारैंटाइन करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अभी तक इन नागरिको को लाने के संबंध में राज्य सरकार से कोई जानकारी नही मिली हैं। जहां तक होटल रिजर्व करने की बात हैं, हमने सरकार के निर्देशानुसार कुछ 14-15 होटलों को जानकारी दी थी, लेकिन बाद में हमने उन्हें अवगत भी करा दिया कि अभी तक हमे राज्य सरकार से इस संबंध में कोई सूचना व निर्देश नही मिले हैं।कोई सूचना नहीं मिलीजैसलमेर के उच्च स्तरीय होटल रंगमहल के मालिक पृथ्वीराज ने बताया कि उन्हें जिला प्रशासन द्वारा विदेशी प्रवासी व्यक्तियों को उनके होटल में ठहराने के लिए चयनित किया था, तथा उन्होंने भी इसके लिये तैयारियां करते हुए करीब 100 रूम को रिजर्व किया था। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये भी होटल को तैयार किया था। इसके लिये उन्होंने स्टाफ भी रोक कर रखा था जो आज भी उनकी होटलों में मौजूद है लेकिन आज एक महिना होने के बावजूद न तो प्रवासी भारतीय नागरिक को यहां पर लाया जा सका और न ही जिला प्रशासन द्वारा उन्हें किसी प्रकार की कोई सूचना दी हैं कि यह प्रवासी नागरिक आएंगे या नहीं, या कब आएंगे।कैसे खोले होटलजैसलमेर व जोधपुर के होटल व्यवसायी अलग तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे है। पर्यटकों की आवक पूरी तरह से थमी हुई है। ऐसे में पर्यटकों के अभाव में होटल खोलना उनके लिए घाटे का सौदा है। कुछ लोगों ने होटल को ठेके पर ले रखा है। उनके समक्ष दोहरा संकट खड़ा हो गया है। होटल का किराया अदा करने के साथ ही कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने में भारी परेशानी आ रही है। ऐसे में कई संचालकों ने होटल खोले ही नहीं।
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जोधपुर का विश्व प्रसिद्ध होटल उम्मेद भवन।

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