जयपुर निम्स में बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों पर अश्वगंधा, गिलोय का ट्रायल किया, मगर कोरोनिल दवा का नहीं

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योगगुरु बाबा रामदेव द्वारा काेरोनिल दवा लॉन्च करने के बाद राजस्थान में इसके क्लीनिकल ट्रायल को लेकर छिड़े विवाद में नया मोड़ आ गया है। निम्स प्रशासन ने साफ किया है कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर की विंग सीटीआरआई (क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री- इंडिया) से अनुमति ली गई थी।इसके तहत निम्स ने कोरोना के 100 बिना लक्षण वाले (एसिम्प्टोमैटिक) मरीजों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत पतंजलि की स्पॉन्सरशिप से अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी आदि की दवा दी थी। इनमें कोई अति गंभीर कोरोना रोगी नहीं था। मगर कोरोनिल टैबलेट का कोई ट्रायल नहीं हुआ।इस संदर्भ में पतंजलि को पत्र भी लिखा गया है कि रिसर्च का इस्तेमाल किसी कॉमर्शियल उपयोग में नहीं किया जाए। क्योंकि अभी ये पायलट प्रोजेक्ट है। ट्रायल की जानकारी मेडिकल के एसीएस को भी दी गई थी। बताया गया था कि सीटीआरआई से इसकी अनुमति मिल चुकी है और क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। बता दें कि विवादों में घिरने के बाद पतंजलि ने कहा था कि ट्रायल सर्दी-जुकाम के मरीजों के लिए था, न कि कोरोना के लिए।विवादों का काेरो-निल ट्रायल 100 मरीजों पर ट्रायल, जिनमें 35% तेजी से रिकवर हुए, बाकी 65% भी ठीक हो गए… लेकिन जो सप्लीमेंट दिए, वो पहले से प्रामाणिकसीटीआरआई की अनुमति के बाद निम्स ने 100 काेरोना मरीजों पर कुछ सप्लीमेंट ट्रायल किए थे। लेकिन ये कोरोनारोधी दवा नहीं थी। संक्रमितों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सवासारी रस, अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी आदि दिए गए थे। यह ट्रायल उन पर ही किया गया था, जिनमें कोरोना के साधारण लक्षण (खांसी, जुकाम या बुखार) थे।100 पेशेंट में से 35 की रिकवरी तेज थी। बाकी 65 मरीज भी ठीक हो गए। 65 की तुलना में 35 जल्दी ठीक हुए यानी जिन लोगों को दवा दी गई, उनमें कुछ बहुत जल्दी ठीक हुए, बाकी कुछ दिन बाद।कोरोना मरीजों को जो सवासारी रस, अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी आदि सप्लीमेंट दिए गए, वे पहले से प्रामाणिक हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में इनका उपयोग चमत्कार नहीं माना जा सकता। यहां तक कि जानवरों पर भी इनका इस्तेमाल हो चुका है और उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ी है। हालांकि, आयुष विभाग भी कह चुका है कि इन चीजों से बना काड़ा काेरोना मरीजों की इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है।जिन पर ट्रायल हुए वे कम गंभीर कोरोना रोगी थे^ हमने कोरोना पेशेंट पर ही क्लीनिकल ट्रायल की सीटीआरआई से अनुमति ली थी, उन्हीं पर ट्रायल किया। ट्रायल गाइडलाइन की सभी शर्तों के अनुसार किया है। इसकी जानकारी एसीएस, मेडिकल को दी गई थी। जिन पर ट्रायल किया वे सभी बिना लक्षण वाले (एसिम्प्टोमेटिक) और कम गंभीर थे। उन्हें आयुर्वेद की प्रामाणिक दवा ही दी गई थी।-डॉ. बीएस तोमर, निदेशक, निम्स
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बाबा रामदेव ने आयुर्वेदिव दवा कोरोनिल लांच की थी। उनका दावा किया था कि यह दवा कोरोना मरीजों को ठीक करती है।

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