रेलवे के जूनियर ऑफिसर ने बिना सीनियर को बताए आदेश निकाले, विरोध हुआ तो वापस लिया

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शिवांग चतुर्वेदी. उत्तर पश्चिम रेलवे में इन दिनों एक रेलवे अधिकारी के आदेश काफी चर्चा में है। ऐसा इसलिए- क्योंकि जिस अधिकारी ने आदेश जारी किए, वो ना तो उन आदेश को जारी कर सकता था और ना ही उसके इन आदेशों के बारे में उसने अपने विभागाध्यक्षको जानकारी दी।ये है पूरा मामलामुख्यालय में कार्यरत मैकेनिकल विभाग के मुख्य रोलिंग स्टॉक इंजीनियर (सीआरएसई) ने 12 जून को एक आदेश जारी कियाजिसमें कहा गया कि जो भी कर्मचारी छुट्टी से नौकरी पर आएगा, उसे सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा और जांच कराकर डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों (क्वारैंटाइन) की पालनकरना होगा।साथ ही अगर कोई कर्मचारी आउट स्टेशन जाने के लिए छुट्टी पर जाएगातो उसे ड्यूटी पर आने के बाद 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन होना पड़ेगा और इस अवधि की छुट्टियां कर्मचारी के खाते से काटी जाएंगी। आदेश जारी होने के करीब 6 दिन बाद परेशान कर्मचारी रेलवे की एम्पलॉइज यूनियन (एनडब्लयूआरईयू) के समक्ष मामले को लेकर गए।यूनियन के महामंत्री मुकेश माथुर ने इस संबंध में रेलवे के प्रिंसिपल सीएमई के समक्ष विरोध किया और आदेश वापस लेने की मांग की। तब इस बात का खुलासा हुआ कि जो आदेश सीआरएसई ने जारी किए हैं उसके बारे में विभाग प्रमुख यानी प्रिंसिपल सीएमई को पता ही नहीं है।इस पर प्रिंसिपल सीएमई ने तुरंत आदेश जारी करने वाले अधिकारी (सीआरएसई) को आदेश निरस्त करने के निर्देश जारी किए। इसके बाद 18 जून को संबंधित अधिकारी ने एक आदेश जारी करते हुए पूर्व में निकाले गए आदेशों को रद्द मानने के निर्देश जारी किए।
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प्रतीकात्मक फोटो।

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