प्री-मानसून की बारिश के साथ किसानों ने शुरू की तैयारी इस साल 3 लाख 37 हजार 500 हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य

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आगामी मानसून सीजन के बाद खरीफ फसल की बुवाई को लेकर किसान व कृषि विभाग ने इंतजाम शुरू कर दिए हैं। दो दिन पहले जिले में कई जगहों पर प्री-मानसून की अच्छी बारिश होेने के बाद किसानों ने सोयाबीन व अन्य की बुवाई शुरू कर दी है। सोयाबीन के प्रमाणित बीज की कम उपलब्धता होने से किसानों को स्वयं बीज ग्रेडिंग कर उपयोग में लेने की सलाह दी गई है।जिले में पिछले दिनों हुई मानसून की अच्छी बारिश के बाद से किसान उत्साहित हैं। किसान खाद, बीज, उर्वरक आदि की व्यवस्था में जुटे हुए हैं। कृषि विभाग की ओर से बाजार में प्रमाणित बीजों की कम पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण किसानों को स्वयं बीज तैयार करने व अंकुरण की जांच करने की सलाह दी गई है।इस साल किसानों का रुझान सोयाबीन, धान, तिल व मक्का की ओर अधिक रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस साल 3 लाख 37 हजार 500 हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सोयाबीन 2 लाख 55 हजार हैक्टेयर, उड़द 31 हजार हैक्टेयर, मक्का 18 हजार, धान 22 हजार, तिल 20 हजार हैक्टेयर सहित अन्य फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।सोयाबीन से मिलता है संबल, 3 लाख 82 हजार मी. टन उत्पादन का अनुमानजिले में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन के उत्पादन से जहां किसानों को आर्थिक संबल मिलता है, वहीं हाड़ौती में लगे उद्योगों की मांग भी पूरी होती है। पांच सालों से बारां जिले में सोयाबीन का अच्छा उत्पादन रहा है। कृषि विभाग ने इस बार जिले में सोयाबीन की बुवाई के लिए 2 लाख 55 हजार हैक्टेयर का लक्ष्य रखा है।अगर मानसून की सक्रियता जल्द रहती है और अनुकूलता से बारिश होती है, तो विभाग का अनुमान है कि इस बार भी सोयाबीन का उत्पादन करीब 3 लाख 82 हजार 500 मीट्रिक टन रहेगा। साल 2019 में 2 लाख 50 हजार 359 हैक्टेयर में सोयाबीन की थी। अतिवृष्टि से फसलों का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ था।^किसान बुवाई के लिए प्रमाणित बीज प्रयोग में लें। बीज के अंकुरण की जांच कर लें। जिले में कुछ जगहों पर प्री मानसून की अच्छी बारिश हुई है। जिन क्षेत्रों में 100 से अधिक बारिश हो चुकी है, वहां बुवाई शुरू कर सकते हैं। 1 से 7 जुलाई के बीच बुवाई का समय फसलों के मुताबिक ठीक रहता है।- डीके सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र अंतारोगों से बचाव के लिए उपचारित करें बीज, मशीन से करें ग्रेडिंगकृषि विभाग के उपनिदेशक अतीश कुमार शर्मा का कहना है कि किसान स्वयं बीज सीड ग्रेडर से ग्रेडिंग कर उन्नत बीज के रूप में बुवाई के लिए उपयोग करें एवं बीज के उपचार के लिए तीन ग्राम थाईराम या एक ग्राम कार्वेण्डेजिम प्रति किलो बीज उपयोग करें, जिससे फफूंदजनित रोगों से बचाव हो सके।इसी तरह उड़द फसल का बीज भी जिन किसानों के पास उपलब्ध है, उसे भी ग्रेडिंग कर उपयोग करें। या फिर किसान ने पिछले साल फसल बोई थी, उनसे क्रय करके बीज को भी उपचारित कर बुवाई करें। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस लक्ष्य के साथ जिले में खरीफ फसलों की बुवाई निर्धारित है और मौसम विभाग के संकेतों के आधार पर जिले में इस बार फसलों की बंपर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले तीन सालों से मौसम की मार झेल रहे किसानों को इस बार नुकसान की भरपाई की उम्मीद भी है।
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बारां. किसानों की ओर से बुवाई को लेकर घरों पर ही बीज उपचारित किया जा रहा है।

आगामी मानसून सीजन के बाद खरीफ फसल की बुवाई को लेकर किसान व कृषि विभाग ने इंतजाम शुरू कर दिए हैं। दो दिन पहले जिले में कई जगहों पर प्री-मानसून की अच्छी बारिश होेने के बाद किसानों ने सोयाबीन व अन्य की बुवाई शुरू कर दी है। सोयाबीन के प्रमाणित बीज की कम उपलब्धता होने से किसानों को स्वयं बीज ग्रेडिंग कर उपयोग में लेने की सलाह दी गई है।
जिले में पिछले दिनों हुई मानसून की अच्छी बारिश के बाद से किसान उत्साहित हैं। किसान खाद, बीज, उर्वरक आदि की व्यवस्था में जुटे हुए हैं। कृषि विभाग की ओर से बाजार में प्रमाणित बीजों की कम पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण किसानों को स्वयं बीज तैयार करने व अंकुरण की जांच करने की सलाह दी गई है।

इस साल किसानों का रुझान सोयाबीन, धान, तिल व मक्का की ओर अधिक रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस साल 3 लाख 37 हजार 500 हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सोयाबीन 2 लाख 55 हजार हैक्टेयर, उड़द 31 हजार हैक्टेयर, मक्का 18 हजार, धान 22 हजार, तिल 20 हजार हैक्टेयर सहित अन्य फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।

सोयाबीन से मिलता है संबल, 3 लाख 82 हजार मी. टन उत्पादन का अनुमान
जिले में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन के उत्पादन से जहां किसानों को आर्थिक संबल मिलता है, वहीं हाड़ौती में लगे उद्योगों की मांग भी पूरी होती है। पांच सालों से बारां जिले में सोयाबीन का अच्छा उत्पादन रहा है। कृषि विभाग ने इस बार जिले में सोयाबीन की बुवाई के लिए 2 लाख 55 हजार हैक्टेयर का लक्ष्य रखा है।

अगर मानसून की सक्रियता जल्द रहती है और अनुकूलता से बारिश होती है, तो विभाग का अनुमान है कि इस बार भी सोयाबीन का उत्पादन करीब 3 लाख 82 हजार 500 मीट्रिक टन रहेगा। साल 2019 में 2 लाख 50 हजार 359 हैक्टेयर में सोयाबीन की थी। अतिवृष्टि से फसलों का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ था।
^किसान बुवाई के लिए प्रमाणित बीज प्रयोग में लें। बीज के अंकुरण की जांच कर लें। जिले में कुछ जगहों पर प्री मानसून की अच्छी बारिश हुई है। जिन क्षेत्रों में 100 से अधिक बारिश हो चुकी है, वहां बुवाई शुरू कर सकते हैं। 1 से 7 जुलाई के बीच बुवाई का समय फसलों के मुताबिक ठीक रहता है।
– डीके सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र अंता

रोगों से बचाव के लिए उपचारित करें बीज, मशीन से करें ग्रेडिंग
कृषि विभाग के उपनिदेशक अतीश कुमार शर्मा का कहना है कि किसान स्वयं बीज सीड ग्रेडर से ग्रेडिंग कर उन्नत बीज के रूप में बुवाई के लिए उपयोग करें एवं बीज के उपचार के लिए तीन ग्राम थाईराम या एक ग्राम कार्वेण्डेजिम प्रति किलो बीज उपयोग करें, जिससे फफूंदजनित रोगों से बचाव हो सके।

इसी तरह उड़द फसल का बीज भी जिन किसानों के पास उपलब्ध है, उसे भी ग्रेडिंग कर उपयोग करें। या फिर किसान ने पिछले साल फसल बोई थी, उनसे क्रय करके बीज को भी उपचारित कर बुवाई करें। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस लक्ष्य के साथ जिले में खरीफ फसलों की बुवाई निर्धारित है और मौसम विभाग के संकेतों के आधार पर जिले में इस बार फसलों की बंपर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले तीन सालों से मौसम की मार झेल रहे किसानों को इस बार नुकसान की भरपाई की उम्मीद भी है।

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बारां. किसानों की ओर से बुवाई को लेकर घरों पर ही बीज उपचारित किया जा रहा है।

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