अमेरिका में दुनियाभर से संक्रमितों के लक्षण-इलाज का डेटा जुटाकर ,सर्दियों में काेराेना से लड़ने की रणनीति बना रहे भारत के 3 डाॅक्टर

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दुनिया काे 6 साल पहले रूबेला ने परेशानी में डाल दिया था, क्याेंकि सभी देशाें के बीच मरीजाें का डेटा साझा नहीं था। इसलिए इस बीमारी से लड़ने में मशक्कताें का सामना करना पड़ा था।अब दुनिया के सभी देश काेराेना से लड़ रहे हैं। लगातार बढ़ रहे मरीज व मौतों के बाद इसके आने वाले पीक सीजन को लेकर वैज्ञानिक व चिकित्सक अपनी-अपनी गणित लगा रहे हैं।रूबेला से सबक लेकर सभी देशाें में काेराेना संक्रमण के हालात, इलाज व रिसर्च को वैश्विक मंच पर लाने के लिए अमेरिका में भारतीय मूल के तीन डॉक्टर्स ने वायरस रजिस्ट्री शुरू की है। इससे अब तक 14 देशों के 156 संस्थान जुड़ चुके हैं।इस टीम में शामिल जयपुर मूल के डॉ. विकास बंसल व डॉ. राहुल कश्यप के मुताबिक सर्दियों में कोरोना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अभी तो इसे पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। ऐसे में पूरी दुनिया का डेटा एक जगह होगा तो कोरोना को हराने में न केवल सहूलियत होगी, बल्कि हर जगह इसके असर और प्रसार को समझ कर रोकथाम में आसानी होगी।दरअसल, मार्च में कोरोना कई देशों में फैला तो संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन भारतीय चिकित्सक डॉ. विकास बंसल, डॉ. राहुल कश्यप व डॉ. विशाखा ने इस वायरस के डेटा को दुनिया के सामने एक स्टडी मैटेरियल के रूप में लाने के लिए वायरल इंफेक्शन एंड रेस्पिरेटरी इलनेस यूनिवर्सल स्टडी (वीआईआरयूएस) रजिस्ट्री की शुरुआत की। उद्देश्य यह था कि रूबेला को लेकर दुनिया के देशों के बीच डेटा शेयरिंग नहीं होने से इस बीमारी से लड़ने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी थी।अब कोरोना से हर कोई जूझ रहा है। ऐसे में रियल टाइम डेटा एक जगह होना जरूरी है। वह भी एक-एक सेंटर का। इसमें अस्पतालों में भर्ती वयस्कों और बच्चों के बारे में संक्रमित होने से लेकर इलाज व निगेटिव होकर डिस्चार्ज होने तक की जानकारी सामने होगी तो उसके एनालिसिस से सर्दियों में कोविड-19 के मामलों की दूसरी लहर होने पर एक साथ लड़ाई लड़ी जा सकेगी।राेगी के भर्ती रहने की अवधि, उनके लक्षण व इलाज जैसी जानकारियां होंगी शामिलजोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉ. बंसल ने बताया कि यूएसए की गैर सरकारी संस्था सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (एससीसीएम) और मेयो क्लीनिक के तहत शुरू की गई इस कवायद में रियल टाइम डेटा डैशबोर्ड तैयार किया है।इसमें प्रत्येक कोविड सेंटर से मैकेनिकल वेंटिलेशन अवधि, आईसीयू व वार्ड में मरीज के भर्ती रहने के दिन, उनकी देखभाल, उनके लक्षण, बिना लक्षण वाले मरीजों की देखभाल, अस्पतालों में खुद संक्रमण से बचने के तरीके जैसे डेटा को समाहित किया जा रहा है। इसके आधार पर कोरोना की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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By collecting data on the symptoms and treatment of infected from around the world in America, 3 doctors of India are strategizing to fight Kareena in winter

दुनिया काे 6 साल पहले रूबेला ने परेशानी में डाल दिया था, क्याेंकि सभी देशाें के बीच मरीजाें का डेटा साझा नहीं था। इसलिए इस बीमारी से लड़ने में मशक्कताें का सामना करना पड़ा था।
अब दुनिया के सभी देश काेराेना से लड़ रहे हैं। लगातार बढ़ रहे मरीज व मौतों के बाद इसके आने वाले पीक सीजन को लेकर वैज्ञानिक व चिकित्सक अपनी-अपनी गणित लगा रहे हैं।

रूबेला से सबक लेकर सभी देशाें में काेराेना संक्रमण के हालात, इलाज व रिसर्च को वैश्विक मंच पर लाने के लिए अमेरिका में भारतीय मूल के तीन डॉक्टर्स ने वायरस रजिस्ट्री शुरू की है। इससे अब तक 14 देशों के 156 संस्थान जुड़ चुके हैं।

इस टीम में शामिल जयपुर मूल के डॉ. विकास बंसल व डॉ. राहुल कश्यप के मुताबिक सर्दियों में कोरोना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अभी तो इसे पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। ऐसे में पूरी दुनिया का डेटा एक जगह होगा तो कोरोना को हराने में न केवल सहूलियत होगी, बल्कि हर जगह इसके असर और प्रसार को समझ कर रोकथाम में आसानी होगी।

दरअसल, मार्च में कोरोना कई देशों में फैला तो संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन भारतीय चिकित्सक डॉ. विकास बंसल, डॉ. राहुल कश्यप व डॉ. विशाखा ने इस वायरस के डेटा को दुनिया के सामने एक स्टडी मैटेरियल के रूप में लाने के लिए वायरल इंफेक्शन एंड रेस्पिरेटरी इलनेस यूनिवर्सल स्टडी (वीआईआरयूएस) रजिस्ट्री की शुरुआत की। उद्देश्य यह था कि रूबेला को लेकर दुनिया के देशों के बीच डेटा शेयरिंग नहीं होने से इस बीमारी से लड़ने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी थी।

अब कोरोना से हर कोई जूझ रहा है। ऐसे में रियल टाइम डेटा एक जगह होना जरूरी है। वह भी एक-एक सेंटर का। इसमें अस्पतालों में भर्ती वयस्कों और बच्चों के बारे में संक्रमित होने से लेकर इलाज व निगेटिव होकर डिस्चार्ज होने तक की जानकारी सामने होगी तो उसके एनालिसिस से सर्दियों में कोविड-19 के मामलों की दूसरी लहर होने पर एक साथ लड़ाई लड़ी जा सकेगी।

राेगी के भर्ती रहने की अवधि, उनके लक्षण व इलाज जैसी जानकारियां होंगी शामिल

जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉ. बंसल ने बताया कि यूएसए की गैर सरकारी संस्था सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (एससीसीएम) और मेयो क्लीनिक के तहत शुरू की गई इस कवायद में रियल टाइम डेटा डैशबोर्ड तैयार किया है।

इसमें प्रत्येक कोविड सेंटर से मैकेनिकल वेंटिलेशन अवधि, आईसीयू व वार्ड में मरीज के भर्ती रहने के दिन, उनकी देखभाल, उनके लक्षण, बिना लक्षण वाले मरीजों की देखभाल, अस्पतालों में खुद संक्रमण से बचने के तरीके जैसे डेटा को समाहित किया जा रहा है। इसके आधार पर कोरोना की लड़ाई लड़ी जाएगी।

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