फिल्म रजिया सुल्तान में जिन रेत के टीलों पर मशहूर गीत ‘क्यों भटकते हैं हम दश्तो सेहरा में’ .. फिल्माया गया था अब वहां निकल आई हैं चट्टानें

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(एम.असलम)। वक्त के साथ सब बदल जाता है इनसान भी और जगह काहुलिया भी।इसका अंदाजा टोंक में बनास नदी के पुराने एवं नए पुल के आस-पास की स्थिति को देखकर बखूबी लगाया जा सकता है। इन तस्वीरों से इसे समझा जा सकता है। 1981-82 के दौरान यहां रजिया सुल्तान फिल्म की शूटिंग हुई थी। मशहूर अदाकारा हेमा मालिनी पर यहां सीन फिल्माया गया था। वे रात में इन टीलों पर चलती हैं और बैकग्राउंड में गाना बजता हैऐसा लगता है, मौज प्यासी है, अपने दरिया में।कमाल अमरोही की फिल्म रजिया सुल्तान की शूटिंग टोंक में 1981-82 में हुई थी। बनास नदी में जां-निसार अख्तर का लिखा गीत ऐ दिल-ए-नादान, ऐ दिले-ए-नादान, आरज़ू क्या है, जुस्तजू क्या है, हम भटकते हैं, क्यों भटकते हैं, दश्तो-सेहरा मेंऐसा लगता है, मौज प्यासी है, अपने दरिया में, कैसी उलझन है, क्यों ये उलझन है, एक साया सा, रू-बरू क्या है, ऐ दिल-ए-नादान, ऐ दिल-ए-नादान, आरज़ू क्या है, जुस्तजूं क्या है..गीत फिल्माया गया था। तब यहां रेत के टीले हुआ करतेथे।रेत अपने साथ बहुत कुछ ले गईयह वही जगह है। 38 साल में बहुत कुछ बदल गया। रेत तो गायब हुई ही नदी भी अब प्यासी सी लगती है। यहां रेत के बड़े-बड़े टीले थे, जो दूर से रेत के पहाड़ जैसे लगते थे। उस रेत में टोंक के देशभर में मशहूर मिश्री जैसी मिठास लिए खरबूज़े की पैदावार होती थी। एक समय टोंक के मशहूर खरबूज़े, जयपुर की खरबूज़ा मंडी की रौनक हुआ करते थे। यहां से प्रदेश के कई जिलों सहित दिल्ली, भोपाल आदि जगह इनकी बहुत मांग हुआ करती थी। ये खरबूजे करीब 500 परिवारों की रोजी रोटी का भी साधन थे। अब उस खरबूजे़ की किस्म तक लुप्त हो चुकी है जिसका बीज रियासत काल में अफगानिस्तान से आया बताया जाता है। आज वहां खरबूजेकी फसल पैदा करना तो दूर, रेत का दोहन इतना हुआ की चट्टानें नजर आती हैं।कभी एक दो फिट पर ही निकल पड़ता था पानीबनास नदी में पानी की आवक 1999 के बाद बीसलपुर बांध बनने के साथ ही खत्म सी हो गईजबकि पहले यहां पानी नजर आता था। जहां रेत के टीले थे, वहां भी एक-दो फीट रेत हटाने पर पानी निकल पड़ता था। अब हाल ये हैं कि बनास नदी में कई जगह कुएं तक सूखे नजर आते हैं – मौज प्यासी है, अपने दरिया में, कैसी उलझन है, क्यों ये उलझन है …रजिया फिल्म का टोंक में फिल्माये गए गाने का सीन।
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बदलाव: साल 81-82 में टोंक में फिल्म रजिया सुल्तान की शूटिंग हुई थी। तब यहां रेत के टीले थे। रजिया का किरदार निभाने वाली हेमा मालिनी को लेकर इन टीलों पर गीत फिल्माया गया था। अब यहां रेत के टीले गायब हो गए हैं और चट्‌टानें निकल आई हैं।

(एम.असलम)। वक्त के साथ सब बदल जाता है इनसान भी और जगह काहुलिया भी।इसका अंदाजा टोंक में बनास नदी के पुराने एवं नए पुल के आस-पास की स्थिति को देखकर बखूबी लगाया जा सकता है। इन तस्वीरों से इसे समझा जा सकता है। 1981-82 के दौरान यहां रजिया सुल्तान फिल्म की शूटिंग हुई थी। मशहूर अदाकारा हेमा मालिनी पर यहां सीन फिल्माया गया था। वे रात में इन टीलों पर चलती हैं और बैकग्राउंड में गाना बजता हैऐसा लगता है, मौज प्यासी है, अपने दरिया में।

कमाल अमरोही की फिल्म रजिया सुल्तान की शूटिंग टोंक में 1981-82 में हुई थी। बनास नदी में जां-निसार अख्तर का लिखा गीत ऐ दिल-ए-नादान, ऐ दिले-ए-नादान, आरज़ू क्या है, जुस्तजू क्या है, हम भटकते हैं, क्यों भटकते हैं, दश्तो-सेहरा मेंऐसा लगता है, मौज प्यासी है, अपने दरिया में, कैसी उलझन है, क्यों ये उलझन है, एक साया सा, रू-बरू क्या है, ऐ दिल-ए-नादान, ऐ दिल-ए-नादान, आरज़ू क्या है, जुस्तजूं क्या है..गीत फिल्माया गया था। तब यहां रेत के टीले हुआ करतेथे।

रेत अपने साथ बहुत कुछ ले गई

यह वही जगह है। 38 साल में बहुत कुछ बदल गया। रेत तो गायब हुई ही नदी भी अब प्यासी सी लगती है। यहां रेत के बड़े-बड़े टीले थे, जो दूर से रेत के पहाड़ जैसे लगते थे। उस रेत में टोंक के देशभर में मशहूर मिश्री जैसी मिठास लिए खरबूज़े की पैदावार होती थी। एक समय टोंक के मशहूर खरबूज़े, जयपुर की खरबूज़ा मंडी की रौनक हुआ करते थे। यहां से प्रदेश के कई जिलों सहित दिल्ली, भोपाल आदि जगह इनकी बहुत मांग हुआ करती थी। ये खरबूजे करीब 500 परिवारों की रोजी रोटी का भी साधन थे। अब उस खरबूजे़ की किस्म तक लुप्त हो चुकी है जिसका बीज रियासत काल में अफगानिस्तान से आया बताया जाता है। आज वहां खरबूजेकी फसल पैदा करना तो दूर, रेत का दोहन इतना हुआ की चट्टानें नजर आती हैं।

कभी एक दो फिट पर ही निकल पड़ता था पानी
बनास नदी में पानी की आवक 1999 के बाद बीसलपुर बांध बनने के साथ ही खत्म सी हो गईजबकि पहले यहां पानी नजर आता था। जहां रेत के टीले थे, वहां भी एक-दो फीट रेत हटाने पर पानी निकल पड़ता था। अब हाल ये हैं कि बनास नदी में कई जगह कुएं तक सूखे नजर आते हैं – मौज प्यासी है, अपने दरिया में, कैसी उलझन है, क्यों ये उलझन है …

रजिया फिल्म का टोंक में फिल्माये गए गाने का सीन।
रजिया फिल्म का टोंक में फिल्माये गए गाने का सीन।

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बदलाव: साल 81-82 में टोंक में फिल्म रजिया सुल्तान की शूटिंग हुई थी। तब यहां रेत के टीले थे। रजिया का किरदार निभाने वाली हेमा मालिनी को लेकर इन टीलों पर गीत फिल्माया गया था। अब यहां रेत के टीले गायब हो गए हैं और चट्‌टानें निकल आई हैं।

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