नेपाल की संसद के ऊपरी सदन में भी नए नक्शे से जुड़ा विधेयक पारित, 57 सांसदों ने समर्थन किया

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नेपाल की राष्ट्रीय सभा (संसद का उच्चसदन) में तीन भारतीय इलाकों भारतीय इलाकों कालापानी, लिंपियाधूरा और लिपुलेख को अपनीसीमा में बताने वालाबिल गुरुवार को पास कर दिया। यह बिल संविधान में बदलाव करने के लिए लाया गया था। नेपाल की कानून मंत्री डॉ. शिवमाया तुम्बाड ने राष्ट्रीय सभा में बिल पेश किया था। राष्ट्रीय सभा के 59 में से 57 सांसदों ने इसका समर्थन किया। अब राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष अग्निप्रसाद सापकोटा इसे राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के सामने पेश करेंगे।दरअसल, नेपाल ने नया राजनीति नक्शा जारी किया है। इसे पास कराने के लिए ही यह बिल लाया गया था। नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में यह बिल 14 जून को ही पारित हो गया था। 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में इसके समर्थन में 258 वोट पड़े थे।भारत ने कड़ा ऐतराज जताया थाभारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने निचले सदन में इस विधेयक के पारित होने पर एतराज जताया था। उन्होंने कहा था, ”हमने गौर किया है कि नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने नक्शे में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक पारित किया है ताकि वे कुछ भारतीय क्षेत्रों को अपने देश में दिखा सकें। हालांकि, हमने इस बारे में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी है। यह ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। ऐसे में उनका दावा जायज नहीं है। यह सीमा विवाद पर होने वाली बातचीत के हमारे मौजूदा समझौते का उल्लंघन भी है।”नेपाल ने नया नक्शा 18 मई को जारी किया थाभारत ने लिपुलेख से धारचूला तक सड़क बनाई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद ही नेपाल की सरकार ने विरोध जताते हुए 18 मई को नया नक्शा जारी किया था। भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी।भारत ने कहा था- यह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। हाल ही में भारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन का नाम लिए बिना कहा था कि नेपाल ने ऐसा किसी और के कहने पर किया।कब से और क्यों है विवाद? नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में एंग्लो-नेपाल जंग के बाद सुगौली समझौते पर दस्तखत हुए थे। समझौते में काली नदी को भारत और नेपाल की पश्चिमी सीमा के तौर पर दिखायागया है। इसी आधार पर नेपाल लिपुलेख और अन्य तीन क्षेत्र अपने अधिकार क्षेत्र में होने का दावा करता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। दोनों देशों के पास अपने-अपने नक्शे हैं।
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नेपाली संसद की राष्ट्रीय सभा ने गुरुवार को भारतीय इलाके से जुड़े विधेयक को पारित कर दिया। यह विधेयक निचले सदन में पहले ही पारित किया जा चुका था।

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