जीएसटी रिफंड क्लेम नोटिस मिला है तो 20 से 29 जून के बीच करें रिप्लाई, हो सकता है तुरंत समाधान

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लॉकडाउन के बाद जीएसटी से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने रिटर्न सहित अन्य सेवाओं की अंतिम तिथियां आगे बढ़ाकर 30 जून कर दीं। इससे टैक्सपेयर्स को नोटिस का जवाब देने की समय सीमा भी 30 जून हो गई।इसके लिए केंद्र सरकार ने ऑर्डिनेंस के जरिए सीजीएसटी एक्ट में संशोधन कर सेक्शन 168ए जोड़ा था। इसी आधार पर ऐसे टैक्सपेयर्स, जिन्होंने रिफंड फाइल किया है, लेकिन यदि उस संबंध में सक्षम अधिकारी ने कोई नोटिस जारी किया है, तो उन्हें 20 से 29 जून के बीच जवाब देना है। ऐसा करने की तारीख से 15 दिनों में निस्तारण संभव हो सकेगा।जीएसटी विशेषज्ञ सीए प्रदीप जैन के अनुसार जीएसटी से संबंधित कार्य की समय सीमा 30 जून तक बढ़ाई जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों के लिए नोटिस जारी करने की समय सीमा भी शामिल है। इसके साथ एक पेचीदगी भी उत्पन्न हो गई कि यदि किसी टैक्सपेयर ने रिफंड फाइल किया है और सक्षम अधिकारी या अपीलीय अधिकारी ने उसे नोटिस जारी किया है, तो उसका जवाब देने की समय सीमा भी 30 जून तक हो गई है।इसमें पेचीदगी यह है कि टैक्सपेयर भी अंतिम तिथि के दिन ही यानी 30 जून को ऑनलाइन पोर्टल पर नोटिस का जवाब देगा, तो सक्षम अधिकारी उसे पढ़कर वापस ऑर्डर कब करेंगे, क्योंकि इसमें भी कुछ समय लगेगा। जबकि, रिफंड देने की समय सीमा तय होती है और इसमें देरी पर टैक्सपेयर सरकार से ब्याज प्राप्त करने का हकदार हो जाता है।इस मामले में सक्षम अधिकारी की कोई गलती नहीं होने के बावजूद सरकार पर ब्याज देने का बोझ पड़ेगा। इसी पेचीदगी का निस्तारण नए नोटिफिकेशन से किया गया है। इसमें टैक्सपेयर को 20 से 29 जून तक की अवधि में कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा।उस स्थिति में टैक्सपेयर अपना जवाब संबंधित विभाग में फाइल करेगा। उस तिथि से 15 दिन के भीतर या 30 जून से पहले, जो भी दाेनों में पहले होगा, अधिकारी के लिए मूल आदेश जारी करने की समय सीमा होगी। नए नोटिफिकेशन से जीएसटी से संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ टैक्सपेयर्स को भी राहत मिली है।
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लॉकडाउन के बाद जीएसटी से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने रिटर्न सहित अन्य सेवाओं की अंतिम तिथियां आगे बढ़ाकर 30 जून कर दीं। इससे टैक्सपेयर्स को नोटिस का जवाब देने की समय सीमा भी 30 जून हो गई।

इसके लिए केंद्र सरकार ने ऑर्डिनेंस के जरिए सीजीएसटी एक्ट में संशोधन कर सेक्शन 168ए जोड़ा था। इसी आधार पर ऐसे टैक्सपेयर्स, जिन्होंने रिफंड फाइल किया है, लेकिन यदि उस संबंध में सक्षम अधिकारी ने कोई नोटिस जारी किया है, तो उन्हें 20 से 29 जून के बीच जवाब देना है। ऐसा करने की तारीख से 15 दिनों में निस्तारण संभव हो सकेगा।

जीएसटी विशेषज्ञ सीए प्रदीप जैन के अनुसार जीएसटी से संबंधित कार्य की समय सीमा 30 जून तक बढ़ाई जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों के लिए नोटिस जारी करने की समय सीमा भी शामिल है। इसके साथ एक पेचीदगी भी उत्पन्न हो गई कि यदि किसी टैक्सपेयर ने रिफंड फाइल किया है और सक्षम अधिकारी या अपीलीय अधिकारी ने उसे नोटिस जारी किया है, तो उसका जवाब देने की समय सीमा भी 30 जून तक हो गई है।

इसमें पेचीदगी यह है कि टैक्सपेयर भी अंतिम तिथि के दिन ही यानी 30 जून को ऑनलाइन पोर्टल पर नोटिस का जवाब देगा, तो सक्षम अधिकारी उसे पढ़कर वापस ऑर्डर कब करेंगे, क्योंकि इसमें भी कुछ समय लगेगा। जबकि, रिफंड देने की समय सीमा तय होती है और इसमें देरी पर टैक्सपेयर सरकार से ब्याज प्राप्त करने का हकदार हो जाता है।

इस मामले में सक्षम अधिकारी की कोई गलती नहीं होने के बावजूद सरकार पर ब्याज देने का बोझ पड़ेगा। इसी पेचीदगी का निस्तारण नए नोटिफिकेशन से किया गया है। इसमें टैक्सपेयर को 20 से 29 जून तक की अवधि में कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा।

उस स्थिति में टैक्सपेयर अपना जवाब संबंधित विभाग में फाइल करेगा। उस तिथि से 15 दिन के भीतर या 30 जून से पहले, जो भी दाेनों में पहले होगा, अधिकारी के लिए मूल आदेश जारी करने की समय सीमा होगी। नए नोटिफिकेशन से जीएसटी से संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ टैक्सपेयर्स को भी राहत मिली है।

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