1993 में हुआ था बड़ा हमला, राजस्थान और गुजरात में टिड्डी नियंत्रण विभाग, लेकिन 27 साल बाद भी 60% पद खाली

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(पूनमसिंह राठौड़)ईरान के रास्ते पाकिस्तान और फिर वहां से भारत में दाखिल होने वाले टिड्डी दल का ये भयानक रूप पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले 1993 में भी टिड्डी दल ने बड़ा हमला किया था। इशके बाद राजस्थान 9 और गुजरात के 2 जिलों में टिड्डी नियंत्रण कार्यालय खोले गए, लेकिन 27 साल बीतने के बाद भी इस विभाग में 60 प्रतिशत पद खाली हैं।इस साल टिड्डी दल देश के पांच राज्यों के 43 जिलों तक पहुंच गए हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अब तक टिड्डी दल 7 अरब रुपए की फसलें चट कर चुके हैं, लेकिन टिड्डी नियंत्रण विभाग के पास स्टाफ के अलावा संसाधनों की भी कमी है। साल 2020 में सबसे ज्यादा प्रभाव टिड्डियों ने राजस्थान के बाड़मेर जिले में दिखाया है। यहां 30 हजार हेक्टेयर में फैली फसलों को ये चट कर गए। बाड़मेर टिड्डी नियंत्रण कार्यालय में 15 कर्मचारियों की पोस्ट है, लेकिन 8 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।बाड़मेर के अलावा राजस्थान के चूरू में 4, जालौर 9, नागौर 5, सूरतगढ़ 4, फलौदी में 8 और जैसलमेर में 15 कर्मचारी तैनात हैं। राजस्थान के बाद गुजरात के भुज में 4 और पालनपुर में 5 कर्मचारी कार्यरत हैं।अधिकतर बॉर्डर पर ही खत्म हो जाते हैं टिड्डीटिड्डी हमलों की थोड़ी बहुत घटनाएं तकरीबन हर साल होती हैं, लेकिन ये पाकिस्तान और भारत की बॉर्डर के कुछ जिलों तक ही सीमित रहते हैं, ऐसा 27 साल बाद हुआ है, जब टिड्डी दल आधे भारत का चक्कर काट चुका है। इससे पहले 1986 में भी पाकिस्तान के रास्ते टिड्डी दल का हमला हुआ था, लेकिन वह राजस्थान बॉर्डर तक ही सिमित रह गया था।
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इस रास्ते भारत में प्रवेश करता है टिड्डी दल।

(पूनमसिंह राठौड़)ईरान के रास्ते पाकिस्तान और फिर वहां से भारत में दाखिल होने वाले टिड्डी दल का ये भयानक रूप पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले 1993 में भी टिड्डी दल ने बड़ा हमला किया था। इशके बाद राजस्थान 9 और गुजरात के 2 जिलों में टिड्डी नियंत्रण कार्यालय खोले गए, लेकिन 27 साल बीतने के बाद भी इस विभाग में 60 प्रतिशत पद खाली हैं।

इस साल टिड्डी दल देश के पांच राज्यों के 43 जिलों तक पहुंच गए हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अब तक टिड्डी दल 7 अरब रुपए की फसलें चट कर चुके हैं, लेकिन टिड्डी नियंत्रण विभाग के पास स्टाफ के अलावा संसाधनों की भी कमी है। साल 2020 में सबसे ज्यादा प्रभाव टिड्डियों ने राजस्थान के बाड़मेर जिले में दिखाया है। यहां 30 हजार हेक्टेयर में फैली फसलों को ये चट कर गए। बाड़मेर टिड्डी नियंत्रण कार्यालय में 15 कर्मचारियों की पोस्ट है, लेकिन 8 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।

बाड़मेर के अलावा राजस्थान के चूरू में 4, जालौर 9, नागौर 5, सूरतगढ़ 4, फलौदी में 8 और जैसलमेर में 15 कर्मचारी तैनात हैं। राजस्थान के बाद गुजरात के भुज में 4 और पालनपुर में 5 कर्मचारी कार्यरत हैं।

अधिकतर बॉर्डर पर ही खत्म हो जाते हैं टिड्डी

टिड्डी हमलों की थोड़ी बहुत घटनाएं तकरीबन हर साल होती हैं, लेकिन ये पाकिस्तान और भारत की बॉर्डर के कुछ जिलों तक ही सीमित रहते हैं, ऐसा 27 साल बाद हुआ है, जब टिड्डी दल आधे भारत का चक्कर काट चुका है। इससे पहले 1986 में भी पाकिस्तान के रास्ते टिड्डी दल का हमला हुआ था, लेकिन वह राजस्थान बॉर्डर तक ही सिमित रह गया था।

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इस रास्ते भारत में प्रवेश करता है टिड्डी दल।

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