रेलवे में 70 दिन तक अटके रहे कई काम, इनका डिजिटाइजेशन नहीं हुआ और ट्रेनें चलीं नहीं

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(शिवांग चतुर्वेदी). देश में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला कंपनी ने पहली ट्रेन 1848 में मुंबई से थाणे (34 किमी) तक चलाई। यहीं से देश में रेलवे के विकास की नींव रखी गई। तब से आज तक रेलवे में बहुत से बदलाव और विकास किए गए। लेकिन आज भी रेलवे में कई ऐसे काम हैं, जो अंग्रेजी हुकुमत के तौर-तरीकों से ही किए जा रहे हैं। रेलवे ने समय के साथ इसमें बदलाव नहीं किया। ऐसे में लॉकडाउन के चलते जब ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा, तो ये सभी काम अटक गए। जबकि इन्हें ऑनलाइन किया जा सकता है। इससे एक तरफ जहां अनावश्यक मैनपॉवर की बचत होगी। तो वहीं दूसरी ओर कार्य प्रणाली पारदर्शी और सुरक्षित बन सकेगी।ट्रैवल अलाउंस से लेकर ओवर टाइमसब कागजों पररेलवे ने हाल ही में डिजिटाइजेशन को बढावा देने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की है। जिसे पूरे देश में लागू कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद अभी भी 20 से अधिक ऐसे काम हैं, जिन्हें ट्रेनों के जरिए ही पूरा किया जाता है। इनमें प्रमुख रुप से दैनिक यात्रा भत्ता (टीए), ओवर टाइम अलाउंस (ओटीए), अनुपस्थिति विवरण (एबसेन्टी), छुट्टी आवेदन (एलए), वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एपीएआर), राष्ट्रीय अवकाश भत्ता (एनएचए) सहित 20 काम शामिल हैं। रेलवे के यूनिट/ब्रांच कार्यालयों द्वारा ये सरकारी कागज ट्रेन में गार्ड के पास रख दिए जाते हैं, जिसे संबंधित विभाग व कार्यालय का प्रतिनिधि स्टेशन पहुंचकर ले लेता है। फिर इन्हें मंडल कार्यलायों में जमा कराने के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाती है, जिसे सैलरी के अतिरिक्त 500 से 1000 रुपए टीए का भुगतान किया जाता है।ये काम जो हुए प्रभावितट्रेनों का संचालन बंद होने के कारण कर्मचारियों के टीए आवेदन, ओटी आवेदन, अनुपस्थिति विवरण, कर्मचारियों की गोपनीय रिपोर्ट, एमसीडीओ/पीसीडीओ के आंकडे, छुट्टी के लिए आवेदन, ओन रिक्वेस्ट ट्रांसफर एप्लिकेशन, वर्क रिज्युम ऑर्डर, पेशीटवाउचर, रनिंग कर्मियों के किलोमीटर अलाउंस, मेडिक्लेम, शिक्षण भत्ता, होस्टल सब्सिडी, एनएच अलाउंस, भर्तियों से संबंधित रिपोर्ट सहित विभिन्न विभागीय विवरण अटके हुए थे। जबकि इन्हें रेलवे द्वारा ऑनलाइन किया जा सकता है।देश आजाद हुआ पर रेलवे नहींदेश को आजाद हुए 72 साल हो गए हैंलेकिन रेलवे में आज भी कई कार्य अंग्रेजी हुकुमत द्वारा बनाए हुए नियमों और व्यवस्थाओं के तहत ही किए जा रहे हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा कर्मचारियों को जरुरी संसाधन उपलब्ध कराकर और प्रशिक्षण देकर कामकाज को सरल और सुरक्षित बनाया जा सकता है। – मुकेश माथुर, सहायक महामंत्री, ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन
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रेलवे में 20 से अधिक ऐसे काम हैं, जिनके कागज ट्रेनों के जरिए एक से दूसरी जगह पहुंचाए जाते है।

(शिवांग चतुर्वेदी). देश में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला कंपनी ने पहली ट्रेन 1848 में मुंबई से थाणे (34 किमी) तक चलाई। यहीं से देश में रेलवे के विकास की नींव रखी गई। तब से आज तक रेलवे में बहुत से बदलाव और विकास किए गए। लेकिन आज भी रेलवे में कई ऐसे काम हैं, जो अंग्रेजी हुकुमत के तौर-तरीकों से ही किए जा रहे हैं। रेलवे ने समय के साथ इसमें बदलाव नहीं किया। ऐसे में लॉकडाउन के चलते जब ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा, तो ये सभी काम अटक गए। जबकि इन्हें ऑनलाइन किया जा सकता है। इससे एक तरफ जहां अनावश्यक मैनपॉवर की बचत होगी। तो वहीं दूसरी ओर कार्य प्रणाली पारदर्शी और सुरक्षित बन सकेगी।

ट्रैवल अलाउंस से लेकर ओवर टाइमसब कागजों पर

रेलवे ने हाल ही में डिजिटाइजेशन को बढावा देने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की है। जिसे पूरे देश में लागू कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद अभी भी 20 से अधिक ऐसे काम हैं, जिन्हें ट्रेनों के जरिए ही पूरा किया जाता है। इनमें प्रमुख रुप से दैनिक यात्रा भत्ता (टीए), ओवर टाइम अलाउंस (ओटीए), अनुपस्थिति विवरण (एबसेन्टी), छुट्टी आवेदन (एलए), वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एपीएआर), राष्ट्रीय अवकाश भत्ता (एनएचए) सहित 20 काम शामिल हैं। रेलवे के यूनिट/ब्रांच कार्यालयों द्वारा ये सरकारी कागज ट्रेन में गार्ड के पास रख दिए जाते हैं, जिसे संबंधित विभाग व कार्यालय का प्रतिनिधि स्टेशन पहुंचकर ले लेता है। फिर इन्हें मंडल कार्यलायों में जमा कराने के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाती है, जिसे सैलरी के अतिरिक्त 500 से 1000 रुपए टीए का भुगतान किया जाता है।

ये काम जो हुए प्रभावित

ट्रेनों का संचालन बंद होने के कारण कर्मचारियों के टीए आवेदन, ओटी आवेदन, अनुपस्थिति विवरण, कर्मचारियों की गोपनीय रिपोर्ट, एमसीडीओ/पीसीडीओ के आंकडे, छुट्टी के लिए आवेदन, ओन रिक्वेस्ट ट्रांसफर एप्लिकेशन, वर्क रिज्युम ऑर्डर, पेशीटवाउचर, रनिंग कर्मियों के किलोमीटर अलाउंस, मेडिक्लेम, शिक्षण भत्ता, होस्टल सब्सिडी, एनएच अलाउंस, भर्तियों से संबंधित रिपोर्ट सहित विभिन्न विभागीय विवरण अटके हुए थे। जबकि इन्हें रेलवे द्वारा ऑनलाइन किया जा सकता है।

देश आजाद हुआ पर रेलवे नहीं

देश को आजाद हुए 72 साल हो गए हैंलेकिन रेलवे में आज भी कई कार्य अंग्रेजी हुकुमत द्वारा बनाए हुए नियमों और व्यवस्थाओं के तहत ही किए जा रहे हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा कर्मचारियों को जरुरी संसाधन उपलब्ध कराकर और प्रशिक्षण देकर कामकाज को सरल और सुरक्षित बनाया जा सकता है। – मुकेश माथुर, सहायक महामंत्री, ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन

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रेलवे में 20 से अधिक ऐसे काम हैं, जिनके कागज ट्रेनों के जरिए एक से दूसरी जगह पहुंचाए जाते है।

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