प्राइवेट स्कूल टीचर परिवार चलाने के लिए सब्जी बेचने पर मजबूर, ट्युशन के लिए भी नहीं आ रहे बच्चे

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(रमेश टेलर). कोरोना वायरस के कारण देश में लगे लॉकडाउन ने लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। शहर से लेकर गांवों तक इसका असर दिख रहा है। एमएससी, बीएड शिक्षक जो कभी स्कूल में छात्रों का भवीष्य बनाते थे, अब सब्जी बेचने को मजबूर हैं। ऐसी ही स्थिति बन गई है शहर के गांधीनगर हाऊसिंह बोर्ड कॉलोनी के रहने वाले नदंलाल खटीक की।किराए पर रहने वाले अध्यापक 47 वर्षीय नदंलाल खटीकबीएससी, एमएससी, बीएड कर चुके हैं। जो प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उन्होंनेबताया कि 15 मार्च से लॉकडाउन के बाद काम के अभाव में बेरोजगार हो गएहैं। स्कूल बंद होने से उन्हे वेतन नहीं मिला। नंदलाल साइंस, मैथ्स की ट्युशन भी पढ़ाते है,लेकिन ट्युशन के लिए भी कोई नहीं आ रहा है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया, इसलिए अब पेट की खातिर घूम- घूम कर सब्जी बेचने को मजबूर हैं।ठेला किराए पर लिया,सुबह से शाम तक सब्जी बेचते हैशिक्षक नंदलाल खटीक ने बताया कि उनके तीन बेटियां हैं। परिवार में पांच सदस्य है। जिसके लिए ठेला किराए पर लिया।बड़ी सब्जी मंडी से सुबह जल्दी उठकर सामानलाते है। सुबह साढ़े 7 बजे से शाम 7 बजे तक शहर की गलियों में घूम-घूम कर सब्जी बेचते है। नंदलाल ने बताया कि सब्जी बेचने से जैसे-तैसे उनका परिवार चल रहा है। उन्हे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सब कूछ जब अच्छा हो जाएगा। तब उन्हे फिर से स्कूल में काम मिलेगा।
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सुबह साढ़े 7 बजे से शाम 7 बजे तक चित्तौड़गढ़ की गलियों में सब्जी बेचते टीचर नंदलाल।

(रमेश टेलर). कोरोना वायरस के कारण देश में लगे लॉकडाउन ने लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। शहर से लेकर गांवों तक इसका असर दिख रहा है। एमएससी, बीएड शिक्षक जो कभी स्कूल में छात्रों का भवीष्य बनाते थे, अब सब्जी बेचने को मजबूर हैं। ऐसी ही स्थिति बन गई है शहर के गांधीनगर हाऊसिंह बोर्ड कॉलोनी के रहने वाले नदंलाल खटीक की।

किराए पर रहने वाले अध्यापक 47 वर्षीय नदंलाल खटीकबीएससी, एमएससी, बीएड कर चुके हैं। जो प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उन्होंनेबताया कि 15 मार्च से लॉकडाउन के बाद काम के अभाव में बेरोजगार हो गएहैं। स्कूल बंद होने से उन्हे वेतन नहीं मिला। नंदलाल साइंस, मैथ्स की ट्युशन भी पढ़ाते है,लेकिन ट्युशन के लिए भी कोई नहीं आ रहा है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया, इसलिए अब पेट की खातिर घूम- घूम कर सब्जी बेचने को मजबूर हैं।

ठेला किराए पर लिया,सुबह से शाम तक सब्जी बेचते है
शिक्षक नंदलाल खटीक ने बताया कि उनके तीन बेटियां हैं। परिवार में पांच सदस्य है। जिसके लिए ठेला किराए पर लिया।बड़ी सब्जी मंडी से सुबह जल्दी उठकर सामानलाते है। सुबह साढ़े 7 बजे से शाम 7 बजे तक शहर की गलियों में घूम-घूम कर सब्जी बेचते है। नंदलाल ने बताया कि सब्जी बेचने से जैसे-तैसे उनका परिवार चल रहा है। उन्हे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सब कूछ जब अच्छा हो जाएगा। तब उन्हे फिर से स्कूल में काम मिलेगा।

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सुबह साढ़े 7 बजे से शाम 7 बजे तक चित्तौड़गढ़ की गलियों में सब्जी बेचते टीचर नंदलाल।

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