एएसओ परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका एक लाख रुपए हर्जाना सहित खारिज, हाईकोर्ट ने कहा, याचिका आधारहीन व तथ्यों के बिना दायर की

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(संजीव शर्मा)।हाईकोर्ट ने 209 पदों के लिए हुई एएसओ (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) भर्ती: 2018 की परीक्षा व उसके परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका को आधारहीन तथा तथ्यों के बिना बताते हुए खारिज कर दिया। वहीं प्रार्थियों पर एक लाख रुपए हर्जाने लगाते हुए हर्जाना राशि को रालसा में जमा कराने का निर्देश दिया है।जस्टिस एसपी शर्मा ने यह आदेश संजय कुमार व 19 अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि मान्यताओं और अनुमानों के आधार पर याचिका मंजूर नहीं कर सकते और याचिका में जो आरोप लगाए हैं उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। प्रार्थियों ने परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों के ज्यादा अंक प्राप्त करने का हवाला दिया है वे किसी एक ही परीक्षा केन्द्र या किसी विशेष जगह से संबंधित नहीं हैं।प्रार्थियों का एएसओ परीक्षा व उसके परिणाम को रद्द करने का आग्रह केवल अनुमान के आधार पर है और इससे पूरी परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार, प्रार्थियों ने 2018 की एएसओ भर्ती परीक्षा व 14 मई 2020 को जारी परिणाम को यह कहते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी कि परीक्षा के बाद से ही उसका पेपर आउट होने की चर्चा थी।बहस के बाद याचिका को तथ्यहीन मानते हुए एक लाख रुपए हर्जाने सहित खारिज कर दियापरीक्षा के बाद यह तथ्य साबित हो गया क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों के अंकों में ज्यादा अंतर था जबकि उनका अकादमिक रिकार्ड सही नहीं था और कई चयनित अभ्यर्थी 10 वीं और 12 वीं परीक्षाओं में बाई ग्रेस पास हुए थे। परीक्षा में एक विशेष जाति के अभ्यर्थी भी ज्यादा पास हुए थे। इसके विरोध में केविएटर व चयनित अभ्यर्थियों के अधिवक्ता एसएन कुमावत ने कहा कि परीक्षा के बाद या उससे पहले पेपर आउट होने की कोई शिकायत नहीं की है। परीक्षा में किसी जाति विशेष का चयन या चयनित अभ्यर्थियों के अकादमिक रिकार्ड के आधार पर पूरी भर्ती परीक्षा पर सवाल नहीं उठा सकते। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर याचिका को आधारहीन व तथ्यहीन मानते हुए एक लाख रुपए हर्जाने सहित खारिज कर दिया।
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Petition challenging ASO exam dismissed

(संजीव शर्मा)।हाईकोर्ट ने 209 पदों के लिए हुई एएसओ (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) भर्ती: 2018 की परीक्षा व उसके परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका को आधारहीन तथा तथ्यों के बिना बताते हुए खारिज कर दिया। वहीं प्रार्थियों पर एक लाख रुपए हर्जाने लगाते हुए हर्जाना राशि को रालसा में जमा कराने का निर्देश दिया है।

जस्टिस एसपी शर्मा ने यह आदेश संजय कुमार व 19 अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि मान्यताओं और अनुमानों के आधार पर याचिका मंजूर नहीं कर सकते और याचिका में जो आरोप लगाए हैं उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। प्रार्थियों ने परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों के ज्यादा अंक प्राप्त करने का हवाला दिया है वे किसी एक ही परीक्षा केन्द्र या किसी विशेष जगह से संबंधित नहीं हैं।

प्रार्थियों का एएसओ परीक्षा व उसके परिणाम को रद्द करने का आग्रह केवल अनुमान के आधार पर है और इससे पूरी परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार, प्रार्थियों ने 2018 की एएसओ भर्ती परीक्षा व 14 मई 2020 को जारी परिणाम को यह कहते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी कि परीक्षा के बाद से ही उसका पेपर आउट होने की चर्चा थी।

बहस के बाद याचिका को तथ्यहीन मानते हुए एक लाख रुपए हर्जाने सहित खारिज कर दिया
परीक्षा के बाद यह तथ्य साबित हो गया क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों के अंकों में ज्यादा अंतर था जबकि उनका अकादमिक रिकार्ड सही नहीं था और कई चयनित अभ्यर्थी 10 वीं और 12 वीं परीक्षाओं में बाई ग्रेस पास हुए थे। परीक्षा में एक विशेष जाति के अभ्यर्थी भी ज्यादा पास हुए थे। इसके विरोध में केविएटर व चयनित अभ्यर्थियों के अधिवक्ता एसएन कुमावत ने कहा कि परीक्षा के बाद या उससे पहले पेपर आउट होने की कोई शिकायत नहीं की है। परीक्षा में किसी जाति विशेष का चयन या चयनित अभ्यर्थियों के अकादमिक रिकार्ड के आधार पर पूरी भर्ती परीक्षा पर सवाल नहीं उठा सकते। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर याचिका को आधारहीन व तथ्यहीन मानते हुए एक लाख रुपए हर्जाने सहित खारिज कर दिया।

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