जोधपुर का ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग एक बार फिर आध्यात्मिक संगीत और सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनने जा रहा है। 13 से 15 फरवरी तक यहां 17वें सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के तत्वावधान में होने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन सूफी संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। इस फेस्टिवल का संरक्षण पूर्व नरेश महाराजा गज सिंह और विश्वप्रसिद्ध संगीतकार गॉर्डन मैथ्यू संनर स्टिंग कर रहे हैं। आयोजन को लेकर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
भारतीय विरासत और सूफी संस्कृति का संगम
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासक कर्नल अजय सिंह शेखावत ने बताया कि 17वें सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल में आध्यात्मिक सूफी संगीत, नृत्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को सूफी परंपरा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद और आपसी समझ को भी बढ़ावा देता है।
विदेशी कलाकारों से सजेगी मेहरानगढ़ की शाम
सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी है। इस वर्ष भी दुनिया के कई देशों से कलाकार जोधपुर पहुंचेंगे। चीन से लिंगलिग वेनेकी गू, जियान ग्रुई लू और क्लेमेंट जैनी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। स्पेन से एपेरनलोपेज और अनाइस ओलिवरास, तुर्की से मेटे एडमैन और एमरेइसिक, ताजिकिस्तान से अक्नाजर अलोवातोव और कुशबख्त नियजोन, ईरान से नगीब शानबेहजादेह और ट्यूनिशिया से जींद जौरी जैसे नामचीन कलाकार फेस्टिवल की शोभा बढ़ाएंगे। इन कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को विभिन्न देशों की सूफी और पारंपरिक संगीत शैलियों से रूबरू कराएंगी।
राजस्थान और देश के दिग्गज कलाकार भी होंगे शामिल
विदेशी कलाकारों के साथ-साथ राजस्थान और देश के प्रसिद्ध कलाकार भी इस फेस्टिवल में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। जोधपुर के साबिर खान, पंजाब के सूफी गायक मदन गोपाल सिंह, रजिया सुल्तान, बैंगलोर के अंबी सुब्रमण्यम और कोणार्क रेड्डी जैसे कलाकार मंच साझा करेंगे। इसके अलावा अनवर खान मांगणियार, मुजफ्फर रहमान, मुस्तफा खान, हनीफ खान और घेवर खान मांगणियार जैसे कलाकार राजस्थानी लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत करेंगे। भारतीय और विदेशी कलाकारों की यह जुगलबंदी फेस्टिवल को विशेष बनाएगी।
2007 से जारी है सांस्कृतिक यात्रा
सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। उस समय यह नागौर के अहिच्छत्रगढ़ में वर्ल्ड सूफी फेस्टिवल के नाम से आयोजित होता था। बाद में इसका विस्तार हुआ और यह मेहरानगढ़ दुर्ग में सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल के रूप में पहचाना जाने लगा। फेस्टिवल के आर्टिस्ट डायरेक्टर एलेन वेबर ने बताया कि आज यह आयोजन दुनिया के शीर्ष चार सूफी संगीत उत्सवों में गिना जाता है। उनके अनुसार, यहां कलाकार केवल प्रस्तुति नहीं देते, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों का जीवंत संगम रचते हैं।
महाराजा गज सिंह पर पुस्तक का विमोचन
इस वर्ष के फेस्टिवल में एक विशेष आकर्षण पुस्तक विमोचन भी होगा। अमन नाथ और योगी वैद्य द्वारा लिखित पुस्तक ‘बापजी: महाराजा ऑफ जोधपुर मारवाड़ – द किंग हू वुड बी मैन’ का विमोचन किया जाएगा। यह पुस्तक महाराजा गज सिंह के जीवन, उनकी विरासत संरक्षण की सोच और दुर्लभ तस्वीरों को समेटे हुए है। यह विमोचन फेस्टिवल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को और भी गहरा बनाएगा।
तीन दिनों का विस्तृत कार्यक्रम
फेस्टिवल का कार्यक्रम सुबह से रात तक विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों पर आयोजित किया जाएगा।
13 फरवरी को सुबह 7:30 बजे जसवंत थड़ा पर अनवर खान मांगणियार के साथ महिलाओं द्वारा भक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। 10:30 बजे चौखेलाव गार्डन में वंदना गाडवी के भजन और रजिया सुल्तान का सूफी गायन होगा। दोपहर 12:30 बजे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम रखा गया है। शाम 5 बजे सनसेट कंसर्ट में चाइनीज कोर्ट म्यूजिक और रात 7 बजे दी सूफी नाइट का आयोजन होगा।
14 फरवरी को सुबह 7 बजे जसवंत थड़ा पर मांगणियार गांव का विशेष प्रदर्शन होगा। शाम 5 बजे राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क में साबिर खान प्रस्तुति देंगे। रात 7:30 बजे जनाना ड्योढ़ी में सत्रिया नृत्य, चाइनीज म्यूजिक और ध्रुपद भजन के बाद जींद जौरी और अंबी सुब्रमण्यम की जुगलबंदी होगी।
15 फरवरी को सुबह 7 बजे रजिया सुल्तान के सूफी गीतों के साथ फेस्टिवल का समापन किया जाएगा।
जोधपुर को मिलेगा वैश्विक सांस्कृतिक सम्मान
सेक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल न केवल जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी खास स्थान दिलाता है। सूफी संगीत और आध्यात्मिक कला के इस महोत्सव के जरिए मेहरानगढ़ दुर्ग एक बार फिर विश्व संस्कृति के केंद्र के रूप में उभरेगा।


