राजस्थान में सरकारी स्कूलों में प्राध्यापक होम साइंस की भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम सामने आने के बाद एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा जारी किए गए अंतिम परिणाम में 16 पदों में से केवल एक अभ्यर्थी ही मुख्य मेरिट सूची में स्थान बना सका है। इसके कारण 15 पद खाली रह गए हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
आरपीएससी ने मंगलवार को इस भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम जारी किया। आयोग के अनुसार न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त नहीं कर पाने के कारण अधिकांश अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिसके चलते इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त रह गए।
परीक्षा में कम उपस्थिति और कम अंक बने कारण
यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए आयोजित प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2024 के अंतर्गत आयोजित की गई थी। होम साइंस विषय के लिए यह परीक्षा 1 जुलाई 2025 को आयोजित हुई थी। इस भर्ती के लिए कुल 2,623 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। हालांकि परीक्षा में वास्तविक उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों में से केवल 949 उम्मीदवार ही परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों में से भी अधिकांश न्यूनतम आवश्यक अंक प्राप्त नहीं कर सके। नतीजतन अंतिम मेरिट सूची में केवल एक ही अभ्यर्थी स्थान बना पाया। इस कारण शेष 15 पदों को भरना संभव नहीं हो सका।
पात्रता जांच के बाद जारी हुआ अंतिम परिणाम
आरपीएससी ने परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की पात्रता जांच की प्रक्रिया भी पूरी की। इसके लिए आयोग ने 11 दिसंबर 2025 को विचारित सूची जारी की थी, जिसमें उन अभ्यर्थियों को शामिल किया गया था जो आगे की प्रक्रिया के लिए पात्र पाए गए थे। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी की गई। अंतिम चरण में उपलब्ध अंकों और मेरिट क्रम के आधार पर चयन सूची तैयार की गई। इस पूरी प्रक्रिया के बाद आयोग ने केवल एक अभ्यर्थी को मुख्य सूची में सफल घोषित किया।
न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक की शर्त
इस भर्ती परीक्षा में चयन के लिए न्यूनतम अर्हक अंक निर्धारित किए गए थे। परीक्षा दो पेपर में आयोजित की गई थी। पहले पेपर के लिए कुल 150 अंक और दूसरे पेपर के लिए कुल 300 अंक निर्धारित थे।दोनों पेपरों में अभ्यर्थियों को न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य था। कई अभ्यर्थी इस न्यूनतम सीमा को पार नहीं कर सके। इसी कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए और अधिकांश पद रिक्त रह गए।
आरक्षित वर्गों की सीटें भी खाली
कटऑफ अंक प्राप्त नहीं होने के कारण विभिन्न आरक्षित वर्गों की सीटें भी भरी नहीं जा सकीं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित पद भी खाली रह गए। इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण के तहत निर्धारित पदों को भी भरा नहीं जा सका। इसका मुख्य कारण यही रहा कि पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी न्यूनतम योग्यता अंक प्राप्त नहीं कर सके।
शिक्षा विभाग के सामने चुनौती
सरकारी स्कूलों में पहले से ही विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में इस भर्ती में अधिकांश पद खाली रह जाने से शिक्षा विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। विशेष रूप से होम साइंस जैसे विषयों में योग्य प्राध्यापकों की कमी छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और योग्य उम्मीदवारों को आकर्षित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाने की आवश्यकता हो सकती है।
आरपीएससी द्वारा जारी इस परिणाम ने यह संकेत भी दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ न्यूनतम योग्यता मानकों को पूरा करना भी अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


