ईरान और इजरायल के बीच अचानक बढ़े तनाव के बाद खाड़ी क्षेत्र में कई स्थानों पर एयर स्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं। इसी कारण दुबई में बड़ी संख्या में भारतीय यात्री फंस गए थे। इनमें राजस्थान के जोधपुर से धार्मिक यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल थे।
सूरसागर के बड़े रामद्वारा से जुड़े संत अमृत राज महाराज के साथ कथा कार्यक्रम में भाग लेने गए 120 श्रद्धालु भी दुबई में फंस गए थे। लगातार प्रयासों और वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था के बाद 5 मार्च को सभी श्रद्धालु सुरक्षित जोधपुर लौट आए।
एयरपोर्ट पर हुआ भावुक स्वागत
जोधपुर एयरपोर्ट पर परिजनों और अनुयायियों ने संत अमृत राज महाराज और श्रद्धालुओं का फूलमालाओं से स्वागत किया। लंबे इंतजार के बाद अपनों से मिलकर सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि वापसी की खुशी के बीच श्रद्धालुओं ने दुबई में झेली गई परेशानियों को लेकर नाराजगी भी जताई।
यात्रियों का कहना है कि 24 से 27 फरवरी तक कथा कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वे 28 फरवरी को भारत लौटने वाले थे, लेकिन अचानक क्षेत्रीय हालात बिगड़ने से उड़ानें रद्द कर दी गईं और उन्हें दुबई में ही रुकना पड़ा।
होटल मालिकों पर शोषण के आरोप
श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि फ्लाइट रद्द होने के बाद उन्हें स्थानीय होटलों में ठहरना पड़ा, जहां किराया दोगुना और तिगुना तक वसूला गया। एक यात्री के अनुसार, पहले बस में बैठाकर पूरा भुगतान लिया गया और उसके बाद ही कमरे उपलब्ध कराए गए। कई श्रद्धालुओं ने इसे मजबूरी का फायदा उठाना बताया।
छह दिन तक असमंजस की स्थिति बनी रही। इस दौरान लगातार भारत लौटने के प्रयास किए गए और सरकार से भी मदद की गुहार लगाई गई। अंततः निजी एयरलाइन की उड़ानों के जरिए यात्रियों को वापस लाने की व्यवस्था हुई।
अलग-अलग मार्गों से पहुंचे जोधपुर
सूत्रों के अनुसार कुछ श्रद्धालु निजी कंपनी की फ्लाइट से अहमदाबाद और कोच्चि एयरपोर्ट पर उतरे, जहां से वे आगे जोधपुर पहुंचे। अलग-अलग साधनों से सभी श्रद्धालु गुरुवार तक अपने गंतव्य पर पहुंच गए।
यह घटना दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ता है। हालांकि सभी श्रद्धालु सकुशल लौट आए, लेकिन दुबई में बीते दिनों की कठिनाइयों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया। फिलहाल परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि संत अमृत राज महाराज सहित सभी 120 श्रद्धालु सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।


