अजमेर और ब्यावर क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम यानी RIICO ने बड़ा कदम उठाया है। क्षेत्र में 11 नए RIICO एरिया विकसित किए गए हैं, जहां उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को सीधे प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। नई औद्योगिक नीति के तहत उद्यमियों को 33 साल की लीज पर प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे और निर्धारित दरों पर 40 प्रतिशत तक की छूट भी दी जाएगी। इससे अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
RIICO की इस नई पहल का उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को मजबूत करना, नए रोजगार अवसर तैयार करना और स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को तेज करना है। लंबे समय से उद्योग जगत की ओर से ऐसी मांग उठाई जा रही थी कि निवेशकों को प्लॉट आवंटन प्रक्रिया आसान बनाई जाए और नई इकाइयों के लिए लागत कम की जाए। अब नई नीति लागू होने के बाद उद्योग लगाने वालों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है।
नए औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट लेने के लिए निवेशकों को राजस्थान सरकार के राज निवेश पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। आवेदन के समय पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म भरना होगा, जिसके बाद मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर ओटीपी भेजा जाएगा। दोनों ओटीपी सत्यापन के बाद आवेदक को शर्तों से सहमति जताकर आवेदन जमा करना होगा। इसके बाद जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी एमओयू मिलने पर आवेदक सीधे प्लॉट आवंटन प्रक्रिया में शामिल हो सकेगा।
RIICO के अधिकारियों के अनुसार नई नीति का मकसद निवेशकों को कम समय में सरल प्रक्रिया के जरिए भूमि उपलब्ध कराना है, ताकि उद्योग स्थापना में देरी न हो। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के साथ बड़े निवेशकों को भी फायदा होगा।
अजमेर जिले में पहले से RIICO के 38 औद्योगिक क्षेत्र मौजूद हैं। इन पुराने क्षेत्रों में कुल 6085 प्लॉट विकसित किए गए थे, जिनमें से अब भी 1712 प्लॉट खाली पड़े हैं। इन खाली प्लॉटों का आवंटन सीधे नहीं किया जाता, बल्कि ई-ऑक्शन यानी ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए समय-समय पर RIICO मुख्यालय की ओर से अधिसूचना जारी की जाती है। पुराने क्षेत्रों के प्लॉट 99 साल की लीज पर दिए जाते हैं।
यदि क्षेत्रवार स्थिति देखें तो अजमेर यूनिट में कुल 3507 प्लॉट विकसित किए गए, जिनमें 1398 प्लॉट अभी भी खाली हैं। वहीं किशनगढ़ यूनिट में 2578 प्लॉट विकसित किए गए, जिनमें 314 प्लॉट उपलब्ध हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में पहले से पर्याप्त औद्योगिक आधार मौजूद है, लेकिन अब नई योजना के जरिए इसे और विस्तार दिया जाएगा।
RIICO के अजमेर और किशनगढ़ यूनिट प्रमुख अंजय विश्वकर्मा ने बताया कि नई योजना में निवेशकों को विशेष सुविधा दी गई है। सीधे आवंटन से उद्योग लगाने की प्रक्रिया तेज होगी और उद्यमियों को बार-बार नीलामी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे औद्योगिक निवेश का माहौल बेहतर होगा।
अजमेर और आसपास के मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों की दरें स्थान के अनुसार अलग-अलग हैं। परबतपुरा और ब्यावर क्षेत्र में प्रति वर्गमीटर दर 5400 रुपये है, जबकि आईटी पार्क की दर 6300 रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई है। मसूदा में 1500 रुपये, केकड़ी में 1100 रुपये, गेगल में 1700 रुपये, सरवाड़ में 1900 रुपये और बैवंजा में 1800 रुपये प्रति वर्गमीटर दर है। किशनगढ़ के विभिन्न फेज में 5350 रुपये प्रति वर्गमीटर तक दरें हैं, जबकि कुछ विस्तार क्षेत्रों में यह कम भी है। नई नीति के तहत इन दरों पर 40 प्रतिशत तक की राहत निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर मानी जा रही है।
अब जिन 11 नए क्षेत्रों को विकसित किया गया है, उनमें सबसे प्रमुख अजयमेरू पालरा एक्सटेंशन है, जहां विकास कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा आईटी पार्क क्षेत्र को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे तकनीकी और सेवा क्षेत्र की कंपनियों को नया विकल्प मिलेगा। केकड़ी एक्सटेंशन, कनेईकला-भिनाय, बैवंजा एक्सटेंशन, मोलकिया केकड़ी, देवपुरा केकड़ी और गेगल जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विस्तार की तैयारी चल रही है।
इसके साथ लोटोटी-जेतारण, मोठी बदनोर और सालाकोट बदनोर जैसे क्षेत्रों को भी नए औद्योगिक नक्शे में शामिल किया गया है। कुछ क्षेत्रों में भूमि आवंटन हो चुका है, कुछ में पर्यावरण मंजूरी और योजना स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है, जबकि कुछ स्थानों पर अतिक्रमण हटाने और बुनियादी विकास कार्यों पर काम चल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अजमेर-ब्यावर क्षेत्र भौगोलिक रूप से औद्योगिक निवेश के लिए काफी उपयुक्त है। यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर, राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल संपर्क से जुड़ा हुआ है। साथ ही यहां श्रमशक्ति, बाजार और लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि RIICO की नई योजना सफल होती है तो यह क्षेत्र राजस्थान का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन सकता है।
नई नीति से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। नए उद्योग स्थापित होने पर उत्पादन इकाइयों, वेयरहाउस, सेवा केंद्रों और सप्लाई चेन नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार सृजित होंगे।


